गैस चैंबर बनी दिल्ली में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने मंगलवार को मेडिकल इमरजेंसी घोषित कर दी। इनका कहना है कि प्रदूषण के साथ मौसम में हो रहे बदलाव लोगों की सेहत के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। पिछले 24 घंटे के भीतर तेजी से बढ़े वायु प्रदूषण ने लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत बढ़ा दी है। अस्थमा मरीजों को लेकर आईएमए का कहना है कि ऐसे मरीज अपने घरों से कतई बाहर न निकलें। मौसम विभाग का हवाला देते हुए आईएमए ने शुक्रवार तक लोगों को ज्यादा समय घर में ही रहने की नसीहत दी है। साथ ही इस समय को नौनिहालों के जीवन के लिए संकटमय बताया है।
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आईएमए की अपील
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smog in delhi
- फोटो : अमर उजाला
1. स्कूलों में आउटडोर स्पोर्ट्स , मैराथन और अन्य आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा देनी चाहिए। खेलते वक्त बच्चों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है और ऐसे में सांस के जरिए प्रदूषित हवा फेफड़े तक पहुंचेगी जो बेहद नुकसानदेह है।
2. 19 नवंबर को होने वाली एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन को रोकनी की अपील की
3. गर्भवती महिलाओं और नौनिहालों के लिए यह खतरनाक स्थिति है। इसकी वजह यह है कि मां के पेट में बच्चा उसी के जरिए सांस लेता है। अगर मां ही प्रदूषण युक्त ऑक्सीजन ग्रहण करती है तो उस नन्हीं सी जान के लिए भी ये प्रदूषित ऑक्सीजन खतरा बन सकती है।
4. शॉपिंग और घूमना फिरना बंद करें। घर से निकलते वक्त मास्क जरूर लगाएं।
5. अस्थमा मरीज घर से निकलते वक्त मुंह पर एन-95 मास्क जरूर लगाकर रखें। किसी भी तरह की इमरजेंसी होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
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दो दिन में 40 फीसदी ओपीडी बढ़ी
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आकाश हेल्थकेयर के वरिष्ठ डॉ. पुनीत खन्ना बताते हैं कि पिछले दो दिन में उनके यहां 40 फीसदी तक ओपीडी बढ़ गई है। द्वारका, उत्तम नगर, जनकपुरी इलाके में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। जबकि बीएलके अस्पताल के डॉ. संदीप नायर ने बताया कि वायु प्रदूषण से इंसान अंदर ही अंदर खोखला होता जा रहा है। किडनी और लिवर सीधे तौर पर संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
प्रदूषण से एलर्जी और आंखों में जलन
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वेंकटेश्वर अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर चारू गोयल ने बताया कि लोगों को इस समय त्वचा संबंधी बीमारी हो रही है। वहीं, आई 7 के निदेशक डॉ. संजय चौधरी का कहना है कि वायु प्रदूषण जिस तेजी गति से बढ़ा है, उससे आंखों में जलन की समस्या भी लोगों को परेशान कर रही है।
प्रदूषण की वजह से लोगों की सेहत को खतरा तो है, साथ ही मौसम में बदलाव भी बीमारियों को बढ़ा रहा है। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. विकास यादव का कहना है कि गर्मी के बाद ठंड की दस्तक शुरुआती दौर में खतरनाक मानी जाती है। सुबह और शाम के वक्त ठंड का अनुभव होने एवं दोपहर में गर्मी का अहसास होने के कारण लोग सतर्कता नहीं बरतते हैं और बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल बताते हैं कि मौसम में बदलाव के साथ ही वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।