फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

विज्ञापन
1 of 10
गाजियाबाद के शरफाबाद गांव का धर्मपाल यादव शुरुआत में जगदीश नगर में डेयरी चलाने वाला और रोजाना साइकिल से दिल्ली में कुछ घरों में दूध पहुंचाने वाला सामान्य दूधिया था।
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

2 of 10
1970 में उसका शराब माफिया किंग कहने जाने वाले बाबू किशनलाल से ऐसा मेलजोल हुआ कि कुछ ही दिनों में वह जरायम की दुनिया के खतरनाक चेहरे डीपी यादव के रूप में पहचाना जाने लगा। उसकी पहचान वाइन किंग के रूप में भी होने लगी। बाद में किशनलाल ने अपने इस शातिर दिमाग शागिर्द को अपना पार्टनर बना लिया।
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

3 of 10
पैसा आते ही यादव ने अपने अपराधों पर राजनीतिक कवच चढ़ाने के लिए सियासी पहचान बनानी शुरू कर दी। पहले वह गांव का प्रधान बना और फिर धन व दबंगई के बल पर ब्लाक प्रमुख का चुनाव जीता। डीपी यादव ने 1988 में कानपुर के फूलबाग मैदान में आयोजित मुलायम सिंह यादव की रैली में लोकदल की सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक पारी की शुरुआत की।

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

4 of 10
यह वही दौर था जब राजनीति में दबंग छवि वालों का प्रवेश शुरू हुआ था। मुलायम सिंह ने डीपी यादव को बुलंदशहर से विधानसभा चुनाव लड़ाया तो उनके जैसे दबंग छवि के प्रकाश पहलवान और महेंद्र भाटी को भी टिकट दिया। प्रकाश पहलवान व डीपी की पटरी नहीं खाती थी।
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

5 of 10
इस वजह से जब प्रकाश पहलवान की हत्या हुई तो उसमें डीपी यादव का नाम आया। प्रकाश को भाटी का करीबी माना जाता था। ऐसे में डीपी और भाटी में ठन गई। बाद में भाटी की भी हत्या हो गई।
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

6 of 10
इस मामले में डीपी यादव आरोपी हुए। आज सियासी दुनिया में डीपी यादव की पहचान अपराध जगत की नुमाइंदगी करने वाले नेता के रूप में है। जिसे महेंद्र सिंह भाटी की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा मिली है।
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

7 of 10
विधायक महेंद्र सिंह भाटी की हत्या में उम्र कैद की सजा पाए बाहुबली नेता डीपी यादव के जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने के सफर में कई बार उसका बचाव किया गया। नीतीश कटारा हत्याकांड में तत्कालीन राज्यसभा सांसद व अपराधी डीपी यादव और उसके बेटे विकास यादव को बचाने के लिए एक पूर्व प्रधानमंत्री ने गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी प्रशांत कुमार को फोन पर धमकी दी थी।

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

8 of 10
हालांकि, आईपीएस अधिकारी ने किसी की भी नहीं सुनी और त्वरित कार्रवाई करते हुए विकास यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह खुलासा रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय ने किया है। विभूति नारायण राय ने ‘किस्सा लोकतंत्र’ नामक एक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा कि कैसे राजनीति का अपराधीकरण किया जाता है।

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

9 of 10
विभूति नारायण राय ने बताया कि 1982 से 1985 तक वह गाजियाबाद के एसएसपी रहे। उन्होंने ही सबसे पहले डीपी यादव के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। डीपी यादव ने सर्फाबाद गांव से गाजियाबाद के राजनगर में शिफ्ट किया था। शराब के अवैध धंधे और कई मर्डर केस उसके खिलाफ दर्ज हो चुके थे।
विज्ञापन

जब एक दूधवाले को बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने किया फोन

10 of 10
उन्होंने बताया कि नीतीश कटारा हत्याकांड के बाद डीपी यादव के रुतबे पर चोट पड़ने लगी तो एक पूर्व प्रधानमंत्री ने गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी प्रशांत कुमार को मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए बोला और तल्ख लहजे में बात करते हुए धमकी भी दी। डीपी उस समय राज्यसभा सांसद था और उस पर इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें