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केजरीवाल की महत्वाकांक्षी डोर स्टेप डिलीवरी योजना ऐसे हो रही फेल, सीएम बोले- ये गंदी राजनीति का रंग

Sat, 15 Sep 2018 01:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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arvind kejriwal
डोर स्टेप डिलीवरी ऑफ सर्विसेज बेशक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन अधिकारियों के लिए इसका क्रियान्वयन चुनौती बनता जा रहा है। खासतौर से कॉल सेंटर पर फेक कॉल करने वालों से, बीते चार दिनों में जिनकी संख्या करीब 20 फीसदी है। अधिकारी भी मान रहे हैं कि इस तरह की दिक्कतें शुरुआती दिनों में आ रही हैं।
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हालांकि, बताया गया कि आने वाले दिनों में इसकी काट निकाल दी जाएगी। दरअसल, योजना लांच होने के बाद से बृहस्पतिवार दोपहर तक अलग-अलग सेवाओं के लिए 372 मोबाइल सहायक आवेदकों के घर पहुंचे, लेकिन इसमें से 76 पते गलत मिले। हैरानी की बात यह कि जब मोबाइल सहायकों ने इनसे वापस संपर्क किया, तो कइयों ने कॉल नहीं उठाई। जिनसे बात भी हुई, उन्होंने दो टूक शब्दों में किसी भी सर्विस की जरूरत न होने की बात कही।
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अधिकारी मानते हैं कि यहां सवाल सिर्फ 76 का नहीं है। इसकी जगह आवेदक के फोन कॉल करने से लेकर अप्वाइंट तय होने तक की प्रक्रिया में कॉल सेंटर संचालक को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में अगर मोबाइल सहायक को आवेदक का पता फर्जी मिलेगा, तो सारी कोशिश नाकाम रहेगी। फिर, फेक कॉल से कॉल सेंटर पर ट्रैफिक भी ज्यादा होगा। इसका सीधा असर यह होगा कि कॉल न लगने से जरूरतमंद लोगों को परेशानी होगी।

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि अभी तक 76 आवेदकों ने गलत पते दर्ज करवाए। आशंका इस बात की है कि कुछ शरारती तत्व स्कीम को नाकाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इस पर भी लगाम लगाने का तरीका निकाल लिया जाएगा।
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मुख्यमंत्री पहले ही जता चुके हैं आशंका
योजना लांच होने के दिन कॉल सेंटर का ट्रैफिक जाम होने पर कयास लगाया गया था कि एक राजनीतिक दल ने स्कीम को फेल करने के लिए कॉल सेंटर्स हायर किए हैं। उन्होंने कहा था कि गंदी राजनीति के लिए लोग कुछ भी कर सकते हैं। इस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर ऐसा है तो यह बेहद हैरान करने वाला है। इसके बाद अधिकारियों की बैठक करके योजना को भावना के अनुसार लागू करने के सख्त निर्देश जारी किए। वहीं, वेबसाइट पर भी रजिस्ट्रेशन करवाने की सेवा शुरू की। इसके अलावा यह भी तय किया गया कि अगर मोबाइल सहायक को एक बार आवेदक से जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पाते तो उसे दोबारा जाना होगा। वहीं, सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योजना की निगरानी कर रहे हैं।
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