बिजनौर के इंदिरा बाल भवन में 10 दिसंबर 2004 में जाट आरक्षण सभा के संयोजक शूरवीर सिंह के साथ अभ
सोमवार को उनके निधन की खबर के बाद दिल्ली के जाट समुदाय में यही यादें फिर से ताजा हो गईं। तालकटोरा में उनका भाषण सुनने वाले लोग आज उसी लहजे में बोले, धर्मेंद्र सिर्फ स्टार नहीं थे, वो हमारे दिल का टुकड़ा थे। उस समय अखिल भारतीय जाट महासभा की युवा ईकाई के महासचिव नरेश शौकीन कहते हैं कि मंच पर आते ही धर्मेंद्र ने भावुक कर दिया था। धर्मेंद्र ने भीड़ को देखा और पहला वाक्य बोला, आज आपके बीच आकर एक ऐसी खुशबू आ रही है, कहीं बाप की शफकत, कहीं भाई का प्यार, कहीं बच्चों का स्नेह।