छोटे नोटों के लिए मारामारी हो रही है, लोग परेशान हैं और बड़े व्यापारी ही नहीं छोटे दुकानदार भी प्रभावित हुए हैं। इस माहौल में भी धंधे का रास्ता तलाश लिया गया है।
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जिसमें न केवल पटरी पर बैठने वाले दुकानदार बल्कि बड़े दुकानदारों का भी फायदा है। दोनों ने तालमेल किया और पटरी पर लगी दुकानों पर आने वाले ग्राहकों के कार्ड बड़े दुकानदारों ने स्वैप करना शुरू कर दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
हुडा की सेक्टर 14 की मार्केट में पटरी पर मिलने वाला सामान काफी चर्चित रहता है। शहर के दूसरे हिस्से में रहने वाले लोग भी शाम की खरीदारी करने यहां पहुंचते हैं। 500 और 1000 का नोट बंद होने के बाद यहां के दुकानदारों की दुकानदारी प्रभावित हुई है। लेकिन उन्होंने इसका रास्ता निकाल लिया।
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- फोटो : अमर उजाला
पटरी पर दुकान लगाने वाले अर्जुन ने अपनी दुकान पर बोर्ड लगा रखा है कि यहां पर सभी बैंक के एटीएम कार्ड स्वीकार किए जाते हैं। अर्जुन सेक्टर 14 में दो साल से पटरी पर दुकान लगाता है। दिल्ली के सदर बाजार और सरोजनी नगर से माल लाकर यहां बेचा जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
बड़े नोट बंद होने से धंधा बंद हो गया। जिसके बाद उसने पास की दुकान में कार्ड से भुगतान की व्यवस्था की है। ग्राहक सामान खरीदते हैं और वह उनका कार्ड पास के दुकानदार के यहां स्वैप करा लेता है।
अर्जुन ही नहीं और भी कुछ दुकानदार हैं जिन्होंने इस तरह की व्यवस्था कर ली है। बदले में वह एक कार्ड स्वैप के 20-25 रुपये बड़े दुकानदार को देते हैं। अर्जुन का कहना है कि बैंक में अभी भीड़ ज्यादा है। स्थित सामान्य होने पर वह भी कार्ड स्वैप की मशीन के लिए आवेदन करेंगे।