बीते वर्ष आठ नवंबर को हुई नोटबंदी की घोषणा से कुछ दिनों तक लोगों को भले ही परेशानी हुई हो, लेकिन इसने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अन्य देशों के मुकाबले तीन वर्ष आगे पहुंचा दिया। ऐसे ही कुछ फायदे और नुकसान जानने के लिए आगे पढ़ें...
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SBI ने कहा कुछ ऐसा...
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एसबीआई
- फोटो : File Photo
देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी ने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अन्य देशों के मुकाबले तीन वर्ष आगे पहुंचा दिया है। बजार में चल रहे विभिन्न प्रकार के प्रीपेड उपकरण जैसे मोबाइल वॉलेट, पीपीआई कार्ड, पेपर वाउचर और मोबाइल बैंकिंग में भी एक साल पहले के मुकाबले 122 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है कि भारत की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी और डिजिटल भुगतान रीढ़ की हड्डी है।
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अस्पताल में डिजिटल पेमेंट को मिला बढ़ावा
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पारस हेल्थ केयर के एमडी डॉ. धर्मेंद्र नागर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि नोटबंदी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र पर बुरा असर पड़ा था। मरीजों से लेकर अस्पताल तक हर कोई प्रभावित हुआ था। लेकिन जब स्थिति सामान्य हुई तो बहुत कुछ परिवर्तन भी नजर आया। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीने के दौरान देशभर के अस्पतालों और मरीजों में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला है। आज उनके यहां आने वाले करीब 95 फीसदी मरीज ई पेमेंट ही कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने सीखा डिजिटल भुगतान
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मोती नगर स्थित कालरा अस्पताल के निदेशक डॉ. आरएन कालरा बताते हैं कि नोटबंदी के दौरान भले ही मरीजों को परेशानी हुई हो, लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि उनके यहां आने वाले ग्रामीण मरीज भी डिजिटल पेमेंट करते हैं। डेबिड, क्रेडिट कार्ड के अलावा नेट बैंकिंग और ई वॉलेट का उपयोग कर भुगतान कर रहे हैं।
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रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भूकंप थी नोटबंदी
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नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा असर शहर में प्रॉपर्टी कारोबार पर पड़ा है। रियल एस्टेट की स्थिति नोटबंदी से पहले अच्छी नहीं थी, लेकिन नोटबंदी के बाद और डगमगा गई। रियल एस्टेट क्षेत्र नोटबंदी को भूकंप से कम नहीं मानता है। फरीदाबाद में प्रॉपॅर्टी का कारोबार 25 से 30 प्रतिशत गिर पड़ा है। जो फ्लैट पहले 40 लाख में मिलता था, अब वह 30 लाख रुपये तक आ पहुंचा है। वहीं एक करोड़ रुपये की कोठी अब 80 लाख रुपये तक आ पहुंची। रियल एस्टेट में आर्गेनाइज्ड सेक्टर तो सुरक्षित है, लेकिन अनआर्गेनाइज्ड सेक्टर, सेकेंड बायर, निवेश बाजार को भारी नुकसान हुआ है।
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आभूषण बाजार था निवेश का दूसरा पसंदीदा विकल्प
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- फोटो : अमर उजाला
निवेश के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर सोने-चांदी को माना जाता है। सोने-चांदी में निवेश को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन नोटबंदी के बाद मंहगा सोना खरीदने, पैसा खपाने की उम्मीदों पर विराम सा लगा है। बाजार में आए उतार चढ़ाव के बाद सोने की कीमतें प्रति दस ग्राम एक से डेढ़ हजार रुपये बढ़ी है, लेकिन मांग नहीं बढ़ सकी है। आभूषण बाजार 30 प्रतिशत नीचे गिरा है। नोटबंदी के एक वर्ष बाद जीएसटी के साथ धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
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ऑटोमोबाइल सेक्टर की धीमी रफ्तार
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Audi e-Tron
नोटबंदी के बाद ऑटामोबाइल सेक्टर की रफ्तार में तेजी नहीं आ सकी है। दुपहिया हो या चौपहिया, करीब 20 से 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। फेस्टिवल सीजन से उम्मीद अधिक थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हो सकी। ऑटोमोबाइल सेक्टर केे जानकारों का कहना है कि व्यापारी वर्ग को नोटबंदी से नुकसान झेल रहा है, जिससे उन्होंने अपना वाहन बुक कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिले में 3200 चौपहिया वाहन का लक्ष्य था, जो पूरा नहीं हो सका।
पेट्रोल-डीजल, सीएनजी के लिए चुनौतीपूर्ण समय
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Petrol Pump
नोटबंदी के बाद पेट्रोप पंप संचालक के पास पी चुनौती अधिक थी। लोग 500, 1000 के बैन नोट को बैंक में ले जाने के बजाय पेट्रोप पंप पर पहुंचे। लोगों ने अपना दुपहिया एवं चौपहिया वाहन का टैंक उन नोटो से फूल करा दिया, इससे पेट्रोल डीजल की खपत 15 प्रतिशत बढ़ गई। उन पुराने नोटों को बैंक में जमा कराना पेट्रोप पंप संचालक के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया था। लोग 500 रुपये का नोट लेकर 100 रुपये का पेट्रोल भरवाने पहुंच रहे थे।
नोटबंदी के शुरू के कुछ महीनों में आतंकवाद, नकली नोटों की तस्करी व हवाला के कारोबार की कमर जरूर टूट गई थी। जानकार मानते हैं कि अब फिर से नकली नोटों की तस्करी, हवाला, ड्रग्स का काला कारोबार और आतंकवाद फिर से मुंह उठाने लगा है। दो हजार का बड़ा नोट आने से हवाला व नोटों की तस्करी और आसानी हो गई है।