दिन की शुरुआत गोलियों की तड़तड़ाहट और पथराव की आवाजों के साथ हो रही थी। दिन चढ़ने के साथ-साथ चिंता बढ़ती जाती थी। आंखों के सामने अब तक के जीवन का सबसे खौफनाक मंजर था। दुकानें लूटी जा रही थीं, जिन्हें बाद में आग के हवाले कर दिया जा रहा था। आसमान में उठते धुएं के गुबार अमन व चैन को लीलने वाली नफरत की आग के गवाह थे।