आपने फिल्मों में ऐसे दृश्य देखे होंगे जिसमें मोमबत्ती की रोशनी में ऑपरेशन किया जाता है लेकिन, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एक बड़े अस्पताल ने तो फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है। दिल्ली के प्रतिष्ठित राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने उस वक्त बालीवुड फिल्म 'थ्री इडियट्स' की याद दिला दी जब यहां आपातकालीन परिस्थिति में एक मरीज का ऑपरेशन करने को कहा गया। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने जब मरीज के गैस्ट्रोइन्टेस्टनल का ऑपरेशन आपातकालीन वार्ड में शुरू किया तो बीच में ही बिजली चली गई और उन्होंने ऑपरेशन को कैन्डल लाईट ऑपरेशन में तबदील कर दिया। सूत्रों का कहना है कि राम मनोहर लोहिया के इमरजेंसी वार्ड की हालत अत्यंत बुरी है।
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three idiots
वास्तव में ओटी की हालत बहुत बिगड़ी हुई है। ओटी में रखे ऑपरेशन करने वाले टेबल की एक टांग टूटी हुई है। हालांकि, अभी भी उसी टेबल पर मरीजों का ऑपरेशन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस अस्पताल ने दुर्व्यवस्था का एक बहुत ही शर्मनाक उदाहरण पूरी दुनिया के सामने ला दिया है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर ने बताया कि मैनेजमेंट ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करते हुए हम पर दबाव बनाया है कि इसी टेबल पर ऑपरेशन किया जाए। इस मुद्दे को गंभीरता से ना लेकर मैनेजमेंट नें काफी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ किया है और अभी भी खिलवाड़ जारी है।
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rml hospital
राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डायरेक्टर डॉ.एके गुप्ता ने इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ ओटी प्रभारी डॉ दुर्गा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें इस टूटे हुए टेबल और टॉर्च लाइट ऑपरेशन के बारे में आज ही पता चला है, इससे पहले उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई थी। अस्पताल के कॉमन इमरजेंसी ओटी में ईएनटी,बाल चिकित्सा,स्त्री रोग और प्लास्टिक सर्जरी का इलाज किया जाता है। यह ओटी अस्पताल के पहले माले पर स्थित है।
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rml hospital
एक डॉक्टर के मुताबिक यहां पांच डिपार्टमेंट होने की वजह से आपस में इस बात को लेकर अक्सर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है कि पहले कौन ऑपरेशन करेगा। एक कंसल्टिंग फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत देश के स्वास्थ्य प्रणाली को आने वाले 20 वर्षों में तीन लाख साठ हजार बिस्तरों,तीन लाख डॉक्टरों और छह लाख नर्सों की जरूरत पड़ेगी।
इसका दुष्परिणाम ये होता है कि स्त्रीरोग विभाग के कई मामलों का सही समय पर इलाज न होने की वजह से उन्हें आपातकाल में भेजना पड़ता है और न चाहते हुए भी उनका ऑपरेशन किया जाता है जो कि चिकित्सीय नजर से अनैतिक माना जाता है।