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तीस हजारी बवाल: थाने खाली, इंसाफ के लिए सड़कों पर उतरे पुलिसकर्मी, परिजनों ने निकाला कैंडल मार्च

Tue, 05 Nov 2019 07:50 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन करते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच बवाल और सोमवार को भी वकीलों की ओर से मारपीट की घटना से आहत पुलिसकर्मियों का मंगलवार को गुस्सा फूट पड़ा। न्याय की मांग को लेकर थाने छोड़कर पुलिसकर्मी सड़कों पर उतर आए। वकीलों के खिलाफ कार्रवाई और खुद की सुरक्षा का हवाला देकर पुलिस मुख्यालय पर दिन भर प्रदर्शन किया गया।
 
पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक सहित तमाम आला अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से काम पर लौटने की अपील की, लेकिन पुलिसकर्मी अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे और किसी भी आला अधिकारी की नहीं सुनी। मंगलवार शाम को इंडिया गेट पर पुलिसकर्मियों के परिजनों ने कैडल मार्च भी निकाला। वहीं दूसरी ओर वकीलों का भी दिल्ली की अदालतों के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रहा। 



 
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दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन करते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
तीस हजारी कोर्ट में शनिवार को बवाल व साकेत कोर्ट के बाहर पुलिसकर्मी की पिटाई के बाद से पुलिसकर्मियों का मनोबल गिरता जा  रहा था। साथ ही पुलिस के मानवाधिकारों की बातें हो रही हैं । सोमवार को भी पुलिसकर्मी से मारपीट के वीडियो वायरल  होने के बाद से सोशल मीडिया के जरिए पुलिसकर्मी एकजुट होने लगे थे। मंगलवार सुबह 15-20 पुलिसकर्मी पुराने पुलिस मुख्यालय पहुंचे। इसके बाद पुलिसकर्मियों को आना शुरू हो गया। दोपहर करीब 12 बजे तक भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लग गया। प्रदर्शन में पुलिस जवान, उनके परिजन और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी भी शामिल थे। न्याय की मांग करते हुए पुलिसकर्मियों ने मुख्यालय के मेन गेट पर कब्जा कर  लिया। 

उच्चाधिकारियों के खिलाफ लगाए नारे
वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से गुस्साये पुलिसकर्मियों ने उच्चाधिकारियों की एक नहीं मानी और उनके सामने ही जमकर नारे लगाए। पुलिसकर्मी ‘उनका अफसर कैसा हो..किरण बेदी व दीपक मिश्रा जैसा हो..के नारे लगाते रहे।  

 
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दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन करते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
पुलिस आयुक्त बैरंग लौटे
दोपहर करीब पौने एक बजे दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक पुलिसकर्मियों को समझाने आए और नौकरी पर वापस जाने को कहा। उन्होंने कहा कि ये परीक्षा, अपेक्षा व प्रतीक्षा की घड़ी है। हम कानून के रखवाले हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर न्यायिक जांच हो रही है। लेकिन पुलिसकर्मी उनके सामने ही नारेबाजी करते रहे। उनके बैरंग लौटने के बाद शाम को सदर्न रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त देवेश श्रीवास्तव प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को समझाने आए। बावजूद इसके पुलिसकर्मी देर शाम तक धरने पर टिके हुए थे। दूसरी तरफ दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कहा कि घायल वकील व पुलिसकर्मियों का बेहतर इलाज कराया जाए साथी ही घायल पुलिस के जवानों को उचित मुआवजा दिया जाए। 

 

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दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन करते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
पहले भी सड़क पर उतरे हैं पुलिसकर्मी
पुलिसकर्मियों ने पहली बार प्रदर्शन किया हो ऐसा नहीं है। दिल्ली पुलिस के जवानों ने वर्ष 1967 में भी प्रदर्शन किया था, लेकिन उस समय उनके आंदोलन को कुचल दिया गया था।

 
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दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन करते पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala
पुलिसकर्मियों की मांग
  • सभी स्तर के जजों की पुलिस सुरक्षा वापस हो।
  • हिंसा में शामिल सभी वकीलों के ऊपर आपराधिक मुकदमा चले।
  • अदालतों से पूर्ण रूप से पुलिस सुरक्षा हटाई जाए।
  • ट्रैफिक पुलिस वकीलों के साथ कोई नरमी न बरतें।
  • वकीलों एवं उनके स्टाफ की दिल्ली के तमाम थानों एवं पुलिस कार्यालयों में एंट्री बंद हो।
  • पुलिस अफसर व कर्मचारी के लिए पुलिस प्रोटेक्शन एक्ट बनें।
  • दिल्ली पुलिस अधिकारी व कर्मचारी संगठन फिर से बहाल हो। 
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