सीपीसीबी के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के मुताबिक 13 नवंबर की रात आठ बजे तक दिल्ली-एनसीआर की हवा में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 का स्तर सामान्य से पांच गुना अधिक था। लेकिन बूंदाबांदी के कारण इसका स्तर दो गुना रह गया है।
बुधवार शाम 6 बजे तक पीएम 10 सामान्य मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से करीब दो गुना अधिक 257 रिकॉर्ड किया गया। वहीं, पीएम 2.5 भी सामान्य मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से करीब दो गुना अधिक 157 माइक्रोग्राम रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि, चिकित्सकों की सलाह है कि प्रदूषण से बचने के लिए बेहतर मास्क का इस्तेमाल और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले फलों का आहार लेना सेहत के लिए मुनासिब होगा।
एनसीआर की हालत भी सुधरी
वहीं, सीपीसीबी की ओर से मंगलवार को जारी 24 घंटे की औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर शहरों का एक्यूआई बहुत खराब (301-399) के बीच बना हुआ है। दिल्ली में 4 नवंबर के बाद से अब तक का यह सबसे अधिक सुधार है। सीपीसीबी ने अब भी अपनी हेल्थ एडवाइजरी में बीमार लोगों को विशेष ख्याल रखने और सामान्य लोगों को खुले वातावरण में मेहनत वाले काम से बचने को कहा है।
पराली जलाने से हुआ गंगा का मैदानी भाग प्रभावित
विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली के विशेषज्ञ विवेक भट्टाचार्य ने बताया कि गंगा के मैदानी भागों में आने वाले राज्यों में बीते आठ दिनों से हवा की गुणवत्ता लाल रंग यानी बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। इसकी बड़ी वजह धान की कटाई और खेतों में बचे अवशेषों को जलाना है। अब खासतौर से उत्तर भारत और मध्य भारत के राज्यों में मौसम के बदलाव होने से कमोबेश यही स्थिति है।
दिल्ली-एनसीआर का वायु गुणवत्ता सूचकांक
शहर एक्यूआई स्थिति
14 नवंबर 13 नवंबर 12 नवंबर 11 नवंबर 10 नवंबर
दिल्ली 312 409 399 405 401
फरीदाबाद 339 438 454 461 440
गाजियाबाद 352 438 423 440 403
नोएडा 332 426 401 445 386
ग्रेटर नोएडा 348 411 454 436 420
नोट : सीपीसीबी के मुताबिक 301 से 399 का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)बहुत खराब और 400 से अधिक एक्यूआई गंभीर श्रेणी वाली वायु गुणवत्ता को दर्शाता है। लंबे समय तक ऐसी हवा के संपर्क में रहने से श्वास संबंधी व अन्य बीमारियां हो सकती हैं।