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Delhi Mundka Fire: बचाई जा सकती थीं कई और जानें, 40 मिनट देर से दी गई थी दमकल विभाग को आग लगने की सूचना

Tue, 17 May 2022 02:04 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
मुंडका हादसे में 27 लोगों की जान चली गई। अब इस बात का मंथन किया जा रहा है कि हादसा इतना बड़ा कैसे हो गया। माना जा रहा है कि बिल्डिंग व कंपनी न तो लापरवाही बरती ही थी, लेकिन यदि बचाव दल समय पर वहां पहुंच जाता था हादसे में मरने वाले लोगों की संख्या को शायद कम किया जा सकता था। आग लगने के बाद दमकल विभाग पर भी एक घंटे देरी से पहुंचने के आरोप लगे।

दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि मुंडका हादसे में आग लगने की कॉल करीब 40 मिनट देर से की गई। शुरुआती जांच के बाद पता चला है कि बिल्डिंग में आग 4.00 बजे के आसपास ही लग चुकी थी। लेकिन किसी ने इसकी खबर न तो पुलिस और न ही दमकल विभाग दी। सबसे पहले 4.41 पर दमकल विभाग को कॉल की गई। इसके बाद 4.50 के आसपास पुलिस को खबर दी गई। घटना तक पहुंचने में भी दमकल की गाड़ियों को खासी मशक्कत करना पड़ी। मौके पर लंबा जाम लगा था। ऐसे में कॉल मिलने के 15 से 20 मिनट की देरी से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच सकी और राहत व बचाव कार्य शुरु हो सका।
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि सूचना मिलने के आसपास पास के चार दमकल केंद्रों से तुरंत दर्जनभर गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। घटना पर पहुंचने वाली सड़क पर पीरागढ़ी तक जाम लगा हुआ था। बड़ी मुश्किल से सड़क के एक केरिजवे को खाली करवाकर वहां पर गाड़ियां पहुंची। हालात को देखते हुए वहां पर करीब 30 गाड़ियां को बुला लिया गया। दमकल के करीब 125 जवान राहत और बचाव कार्य में जुट गए। आग पर शुक्रवार रात 10.50 पर ही काबू पा लिया गया था। लेकिन अगले दिन शनिवार दोपहर 12.00 बजे आग को बुझाने का काम चलता रहा। 
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
गर्ग ने बताया कि इमारत में दमकल की एनओसी थी या नहीं वह अलग बात है, लेकिन बिल्डिंग में बड़े हादसे का सारा सामान मौजूद था। इमारत में आने जाने के लिए जिन सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसी बिजली के मीटर लगे थे। इसके अलावा जीने पर ही जनरेटर रखने के लिए भारी मात्रा में पैक सामन भी जीने पर रखा था। आग लगी तो वह तेजी से ऊपर की ओर बढ़ी और उसने किसी को बचने का मौका नहीं दिया।

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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
फायर की एनओसी हो या नहीं, लेकिन आग से बचाव के रखे इंतजाम...
लाख प्रयासों के बाद भी राजधानी के कई इलाकों में प्रशासन की मिली-भगत से इस तरह की अवैध फैक्टरियां चल रही हैं। कोई बड़ा हादसा होता है तो सभी को नियम कानून याद आने लगते हैं। दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि जरूरी नहीं है कि ऐसी फैक्टरी या कोई कंपनी चलाने वाले मालिक के पास फायर की एनओसी या काम करने का लाइसेंस हो। कम से कम ऐसे लोग आग से बचाव के कुछ इंतजाम अपने स्थर पर कर सकते हैं। बेसिक इंतजाम करने से न सिर्फ समय पर हादसा को टाला जा सकता है बल्कि उससे जान-माल के नुकसान की संभावना भी कम हो जाती है।
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
इन बातों का ध्यान रखकर आग की घटनाओं को किया जा सकता है कम...
. हमेशा फैक्टरी या कंपनी में आग से बचाव के बेसिम इंतजाम (अग्निशमन सिलिंडर, पानी का इंतजाम) करना चाहिए।
. गर्मियों के दौरान ऑफिस, दफ्तर में चलने वाले एसी को लगातार न चलाई, उसे कुछ देर के लिए रेस्ट जरूर दें। ऐसा करने से शार्ट सर्किट की संभावना कम होगी।
. समय-समय पर अपनी कंपनी, दफ्तर व घरों की वायरिंग की जांच जरूर करवाएं, यदि वायरिंग पर जरा भी शक हो तो उसे तुरंत बदलवा दें।
. हमेशा सीढ़ियों की जगह को खाली रखें, वहां कभी भी कोई सामान न रखें, लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं तो सप्ताह में एक दिन सीढ़ियों का यूज करें।
. दमकल विभाग हर विभाग को मुफ्त में आग से बचाव की ट्रेनिंग उपलब्ध करवाता है, यदि संभव को तो अपनी कर्मचारियों के लिए इसका लाभ जरूर लें।
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Delhi Mundka Fire - फोटो : अमर उजाला
कोविड के बाद फैक्टरियों में अंधाधुन हो रहे काम से बढ़ रही आग की घटनाएं...
दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि अमूमन गर्मियां आते ही आग की घटनाओं में इजाफा होता है। लेकिन इस साल आग लगने की घटनाएं कुछ ज्यादा ही सामने आ रही हैं। इनमें भी निजी फैक्टरियों में आग लगने के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। अकेले अप्रैल की बात करें तो 30 दिनों के भीतर 4140 कॉल आईं। वहीं मई के शुरूआती 13 दिनों में इन कॉल्स की संख्या 1295 रही। गर्ग ने बताया कि आग की कॉल बढ़ने की एक वजह कोविड के बाद अचानक उत्पादन बढ़ाने के लिए राजधानी की फैक्टरियों में 24-24 काम करवाना है। लगातार काम होने के कारण यहां आग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। फैक्टरी मालिक इस पर जरूर ध्यान दें।
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