हर गली में मातम के बीच-बीच में रोने की आवाज, घरों में मातम पसरा है तो सड़कों पर वीरानी। भाग्य विहार के लिए मुंडका अग्निकांड दुर्भाग्य बन गया। कभी मदनपुर डबास क्षेत्र की 10 से अधिक बेटियां इसी इमारत में काम करती थीं, जहां भीषण आग लगने से 27 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक की शिनाख्त के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। छह अभी भी गुमशुदा हैं जबकि शेष भीषण आग की चपेट में खुद को किसी तरह बचाने में कामयाब रहीं। गुमशुदा बेटियों में से एक निशा के परिजनों की नाउम्मीदी हावी है। अगर मेरी बेटी(निशा) नहीं लौटी तो शेष छह बेटियों का गुजारा कौन करेगा, किसके भरोसे रहूंगी।