दिल्ली के कंझावला कांड में अंजलि को घसीटती हुई कार कैसे आगे गई, अब भी सवाल है। उस मॉडल के कार की ग्राउंड क्लीयरेंस भी 170 मिमी. यानी महज 17 सेंटीमीटर है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि टक्कर के बाद अगर चालक ने अंजलि से अंजान होकर भी कार को आगे ले गया तो यह आसान नहीं था। कंझावला रोड को जोड़ने वाली सुल्तानुपरी-करण विहार के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर में 10 से अधिक गड्ढे और स्पीड ब्रेकर है। दो स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 5-6 सेंटीमीटर के करीब थी यानी सड़क और कार की बॉडी के बीच महज 11-12 सेंटीमीटर का फासला था। फिर भी कार बगैर किसी रुकावट अंजलि को साथ घसीटती हुई कैसे आगे बढ़ती रही।
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Delhi Case
- फोटो : अमर उजाला
कम जगह होने की वजह से रास्ते में ब्रेकर से टक्कर होने के बाद किसी भी इंसान के आसपास ही गिरे होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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अंजलि का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
कंझावला कांड के एक हफ्ते बाद भी परिजन, स्थानीय लोगों समेत सभी के लिए यह सवाल अनसुलझा है कि आखिरकार 13 किलोमीटर तक कोई लड़की कार के नीचे से कैसे घसीटती हुई चली गई।
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लोग भी हैरत में हैं कि आखिरकार सड़क पर इतनी बाधाएं होने के बाद भी कार कैसे किसी को घसीटती हुई जा सकती है।
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पुलिस और कार कंपनी के विशेषज्ञ इससे जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है, लेकिन टक्कर के बाद अंजलि के लंबी दूरी तक कार के साथ घसीटे जाने की स्टोरी साफ नहीं हो सकी है।
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ब्रेकर पर कार-सड़क के बीच महज 12 सेंटीमीटर का फासला : करण विहार से शनि बाजार चौक के बीच दो बड़े स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 5-6 सेंटीमीटर के करीब है।
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यानी अगर कार में कुछ फंसा है तो उसे निकलने के महज 11-12 सेंटीमीटर की जगह बचती है। आखिरकार, कहां और कैसे अंजलि सिमट गई कि इतनी दूरी तक घिसटती चली गई।