विरोध प्रदर्शन करते लोग
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मसलन, मीना बाजार में फुटपाथ पर कपड़ों की दुकान लगाए अकबर खान कहते हैं कि साहब, हमारा घर मिदनापुर है। रोजी-रोटी के लिए पांच साल पहले दिल्ली आ गया। यहां का कोई कागज है नहीं। घर का भी पक्का नहीं कि कोई दस्तावेज होगा। फिर, पिछले दस दिनों से इलाके में काना-फूसी चल रही थी कि कागज न होने से देश के नागरिक नहीं रहोगे। शुक्रवार को जब मस्जिद में प्रदर्शन की बात उठी तो लगा कि यह तो अपनी भी समस्या है। इसके बाद हम भी उनके साथ हो लिए। दिन-भर की उछल-कूद के बाद शाम का चूल्हे-चौके और सुबह रोजी पर बैठ गए हैं।