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Rekha Gupta: इन वजहों से रेखा गुप्ता को मिला दिल्ली का ताज... भाजपा ने खींची विपक्ष के सामने बड़ी लकीर

Thu, 20 Feb 2025 08:51 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दिल्ली की शालीमार बाग विधानसभा सीट से जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वालीं रेखा गुप्ता दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी। रेखा को चुनकर भाजपा ने कई राजनीतिक संदेश दिए हैं। जानें क्यों रेखा गुप्ता के नाम पर लगी मुहर?
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Rekha Gupta - फोटो : अमर उजाला
रेखा गुप्ता दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी। वह देश की दूसरी और मौजूदा भाजपा शासित राज्यों की पहली महिला मुख्यमंत्री होंगी। विधायक दल की बुधवार शाम हुई बैठक में पर्यवेक्षक रविशंकर प्रसाद व ओपी धनखड़ की मौजूदगी में सीएम पद के एक अन्य दावेदार प्रवेश वर्मा ने रेखा के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि आशीष सूद व विजेंद्र गुप्ता ने इसका समर्थन किया। 

सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी के बाद रेखा गुप्ता दिल्ली में मुख्यमंत्री पद संभालने वाली चौथी महिला हैं। उनका नाम पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री पद के पांच शीर्ष दावेदारों में लिया जा रहा था और आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली की कमान सौंपने का फैसला किया।
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रेखा गुप्ता ने पेश किया सरकार बनाने का दावा - फोटो : ANI
रेखा इसलिए... महिलाओं, कोर मतदाताओं को साधने का दांव 
  • दिल्ली की जीत में इस बार बाकी राज्यों की तरह महिलाओं ने भाजपा का पूरा साथ दिया। पार्टी चाहती है कि यह समर्थन आधार आगे भी साथ रहे। चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक था। महिला मतदाताओं के लिए भाजपा ने बड़े वादे भी किए हुए हैं। 
  • 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भाजपा या उसके सहयोगियों की सरकार है, पर कहीं भी सरकार की कमान महिला के हाथ में नहीं है। अब यह कमी पूरी कर दी। भाजपा नारी शक्ति वंदन विधेयक पहले ही ला चुकी है। 
  • सीएम पद के अन्य दावेदारों की तुलना में रेखा अपेक्षाकृत नया चेहरा हैं। किसी तरह का विवाद भी उनसे जुड़ा नहीं है। 
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रेखा गुप्ता बनीं दिल्ली की मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला
  • रेखा का परिवार संघ से जुड़ा है। उनका सियासी जीवन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष रहीं। फिर भाजपा में आईं। संगठन में काम किया। दिल्ली भाजपा की महासचिव रहीं, अभी महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं। 
  • भाजपा के कोर वोटर माने जाने वाले वैश्य समाज के अरविंद केजरीवाल के साथ जाने से उसे सियासी वनवास से गुजरना पड़ा था। इस चुनाव में वैश्य समुदाय की फिर भाजपा में वापसी हुई, तो पार्टी ने रेखा को चुना। इस तरह, केजरीवाल व आतिशी दोनों का विकल्प तलाशने का दांव चला।


 

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भाजपा विधायक रेखा गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
रेखा बनाम आतिशी
भाजपा भले ही प्रचंड बहुमत से दिल्ली विधानसभा में पहुंची है, लेकिन विपक्ष भी कमजोर नहीं है। आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी के 22 विधायक सदन में होंगे। कयास लगाया जा रहा है कि आतिशी को नेता विपक्ष के रूप में आप पेश करेगी। ऐसे में सत्ता पक्ष की महिला मुख्यमंत्री ही विपक्ष को करारा जवाब देने में सक्षम होंगी। सदन में तू-तू, मैं-मैं की स्थिति में सत्ता पक्ष अपने सदन के नेता को विपक्ष के सामने चुनौती दिलवाने में कामयाब रहेंगे।

 
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रेखा गुप्ता, दिल्ली की मुख्यमंत्री - फोटो : पीटीआई
हरियाणा और वैश्य समुदाय को साधा
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को दिल्ली का बेटा जरूर कहते हैं। उनका पैतृक निवास हरियाणा में ही है। रेखा का मूल निवास भी हरियाणा ही है। इतना ही नहीं केजरीवाल वैश्य समाज से आते हैं। इसी तरह रेखा गुप्ता भी वैश्य समाज से ही आती हैं। दिल्ली में इस समाज का वोट बैंक भी अधिक है। इस तरह से रेखा गुप्ता भाजपा के इस खांचे में भी ठीक बैठती हैं। इस तरह से भाजपा ने वैश्य समाज को भी साधा है। वैश्य समाज को भाजपा का कट्टर समर्थक माना जाता रहा है।

 
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रेखा गुप्ता - फोटो : जी पाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी करीबी
रेखा का संघ परिवार से तीस साल पुराना नाता है। वे छात्र राजनीति से ही सक्रिय रही हैं। भाजपा के छात्र संगठन में भी लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। 1996-97 में दिल्ली छात्र संघ में काफी सक्रिय रही हैं। छात्र संघ से सियासी सफर शुरू करके निगम में सक्रिय दखल रखने वाली रेखा गुप्ता को दिल्ली की नब्ज पता है। वे दिल्ली की मौजूदा सियासत में फिट बैठती हैं।

 
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रेखा गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
महिला और युवाओं में पैठ
रेखा को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर भाजपा ने दिल्ली की महिलाओं और युवाओं में भी पैठ बनाने की कोशिश की है। भाजपा अपने चुनावी राज्यों में आधी आबादी को साधने के लिए महिला सम्मान योजना संकल्प पत्र में रखती है। दिल्ली वालों से भी वादा किया है कि पहली कैबिनेट बैठक में महिला सम्मान योजना के तहत 2500 रुपये देने का फैसला लिया जाएगा। इसी तरह छात्र राजनीति से दिल्ली की मुख्यमंत्री तक का सफर करने वाली रेखा के माध्यम से भाजपा युवा वर्ग को भी साधने का प्रयास करेगी।


 

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प्रवेश वर्मा - फोटो : एएनआई
ये भी थे दावेदार 
प्रवेश वर्मा

दिल्ली में सीएम पद पर सस्पेंस खत्म होने से कई विधायकों को झटका भी लगा है। नई दिल्ली से विधायक चुने गए प्रवेश वर्मा इस रेस में पिछड़ गए हैं। हालांकि, उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। भाजपा उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने का एलान कर सकती है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को हराने वाले प्रवेश वर्मा सीएम की रेस में सबसे आगे थे। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे होने से भाजपा दिल्ली में परिवारवाद को लेकर अपने ऊपर आरोप नहीं लगने देना चाहती है। साथ ही, पार्टी यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह किसी भी आम कार्यकर्ता और पहली बार विधायक बने नेता को भी शीर्ष पद पर पहुंचा सकती है। 

 

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vijender gupta - फोटो : X @ANI
विजेंद्र गुप्ता
रोहिणी से विधायक चुने गए विजेंद्र गुप्ता भी सीएम पद की रेस में आगे चल रहे थे। उन्हें दिल्ली की राजनीति का अनुभव भी है। एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन से लेकर विधानसभा नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी वे दो बार संभाल चुके हैं। दरअसल पार्टी की सोच है कि नए चेहरे को भी तरजीह मिलनी चाहिए। खासकर महिला मुख्यमंत्री का दावा उनसे ज्यादा प्रबल साबित हुआ। रेखा महिला भी हैं और वैश्य समाज से भी आती हैं। हालांकि, विजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक अनुभव को देखते हुए पार्टी विधानसभा अध्यक्ष का पद उन्हें दे सकती है। 

 

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अमित शाह के साथ आशीष सूद - फोटो : X @ANI
आशीष सूद 
लंबे राजनीतिक अनुभाव के बावजूद जनकपुरी विधानसभा से पहली बार विधायक बने आशीष सूद भी सीएम रेस में पिछड़ गए। जबकि वे भाजपा के गोवा व जम्मू कश्मीर के प्रभारी भी हैं। सूद पंजाबी समाज से आते हैं। प्रदेश भाजपा नेतृत्व भी पंजाबी समाज से ही है। ऐसे में रेखा गुप्ता को वैश्य और महिला होने का फायदा मिला। साथ ही, सूद के पास संगठन की भी जिम्मेदारी है। हालांकि, मंत्री पद का एलान नहीं हुआ है। संभवत पार्टी सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला देखते हुए उन्हें पद सकती है। 

 
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भाजपा उम्मीदवार सतीश उपाध्याय - फोटो : ani
सतीश उपाध्याय
मालवीय नगर से विधानसभा जीतने वाले सतीष उपाध्याय भी सीएम के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। पार्टी का मानना है कि इस रेस में महिला मुख्यमंत्री पहली पसंद थी, लिहाजा वह भी पिछड़ गए। उपाध्याय मध्यप्रदेश के प्रभारी भी हैं और पार्टी ने उन्हें एनडीएमसी का उपाध्यक्ष भी बनाया है। 


 
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