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Delhi Blast: पिछले साल से फिदायीन हमले की तैयारी में था उमर... दानिश के पीछे हटने और इस कारण फेल हुआ था प्लान

Mon, 17 Nov 2025 09:36 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दिल्ली धमाके की जांच में डॉक्टर उमर को लेकर एक और नया खुलासा हुआ है। उमर पिछले साल से आत्मघाती हमलावर की तलाश में था। दानिश नाम के उमर के साथी के पीछे हटने से अप्रैल में साजिश विफल हो गई थी। 
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Delhi Blast - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिस सफेदपोश डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, वह पिछले साल से ही आत्मघाती हमलावर की तलाश में था। मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर नबी इस षडयंत्र को लगातार आगे बढ़ा रहा था। आतंकियों की साजिश अप्रैल में दानिश के इस्लाम में खुदकुशी वर्जित होने का हवाला देते हुए पीछे हटने से विफल हो गई थी। 

जांच अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड से पकड़े गए आरोपी जसीर उर्फ दानिश से पूछताछ में पता चला कि डॉ. उमर घोर कट्टरपंथी था। वह इस बात पर लगातार जोर देता था कि आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए एक आत्मघाती हमलावर की जरूरत थी। 
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मस्जिद के बाहर निकलते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ डॉक्टर उमर - फोटो : वीडियो ग्रैब
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिस सफेदपोश डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, वह पिछले साल से ही आत्मघाती हमलावर की तलाश में था। मुख्य साजिशकर्ता डॉ. उमर नबी इस षडयंत्र को लगातार आगे बढ़ा रहा था। आतंकियों की साजिश अप्रैल में दानिश के इस्लाम में खुदकुशी वर्जित होने का हवाला देते हुए पीछे हटने से विफल हो गई थी। 
 
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संदिग्ध डॉ. मोहम्मद उमर - फोटो : पीटीआई
जांच अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड से पकड़े गए आरोपी जसीर उर्फ दानिश से पूछताछ में पता चला कि डॉ. उमर घोर कट्टरपंथी था। वह इस बात पर लगातार जोर देता था कि आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए एक आत्मघाती हमलावर की जरूरत थी। 

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दिल्ली में हुए धमाके के बाद मौके पर तैनात पुलिसबल - फोटो : पीटीआई
आपराधिक रिकॉर्ड जिनका नहीं, उन्हें बना रहे आतंकी 
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी समूहों के आका सुरक्षा बलों की नजर से बचने के लिए अब नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। आतंकियों की नई भर्ती में वे उन युवाओं को शामिल कर रहे हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड या अलगाववादी जुड़ाव नहीं है।
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद मौके पर तैनात सुरक्षाबल - फोटो : पीटीआई
अधिकारियों का कहना है कि यह दो दशक पुरानी रणनीति से अलग है, जिसमें आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाती थी।  सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि अब तक गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ में इस नए पैटर्न का पता चला है।
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद जांच करती टीम - फोटो : पीटीआई
एक अधिकारी ने कहा, डॉ. अदील, उसके भाई डॉ. मुजफ्फर राथर और डॉ. मुजम्मिल गनई जैसे आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता नहीं है। इन कट्टरपंथी युवाओं के परिवार के सदस्यों का भी किसी अलगाववादी या आतंकी संगठन से पूर्व संबंध नहीं है। यहां तक कि डॉ. उमर का भी कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। उसका परिवार भी इस मामले में बेदाग रहा है
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद वाहन के पुर्जे को लेकर जाता पुलिसकर्मी - फोटो : पीटीआई
सूत्रों के मुताबिक, यह जम्मू-कश्मीर या पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी समूहों की सोची-समझी चाल है, ताकि उच्च शिक्षित युवाओं और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को आतंकी गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाए

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डॉ. शाहीन व डॉ. परवेज - फोटो : अमर उजाला।
फंडिंग जुटा रहे थे शाहीन और डॉक्टर परवेज
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद माड्यूल की अहम सदस्य डॉ. शाहीन ने आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए कई देशों से फंडिंग जुटाई थी। जैश के इशारे पर उसे विदेशों में रहने वाले कश्मीरी मूल के डॉक्टरों से संपर्क स्थापित कर फंडिंग का बंदोबस्त करने का जिम्मा सौंपा गया था। इसमें उसका भाई डॉ. परवेज भी मदद कर रहा था। राजधानी निवासी दोनों भाई-बहन की जांच में सामने आया है कि वह पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों के डॉक्टरों के संपर्क में थे। 

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Terror Module - फोटो : अमर उजाला
जांच एजेंसियां शाहीन द्वारा 30 लाख रुपये से अधिक रकम जुटाने के पुख्ता सुबूत जुटा चुकी है और आगे की जांच जारी है। जैश ने सुनियोजित साजिश के तहत राजधानी निवासी डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज को यह काम सौंपा था। दरअसल, इस माड्यूल से जुड़े अधिकतर डॉक्टर कश्मीर मूल के हैं, जिनके जरिये फंडिंग करने से फंसने का डर था

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डॉ. मुजम्मिल की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
छानबीन में पता चला है कि डॉ. शाहीन, मुजम्मिल के नेटवर्क से कई लोग जुड़े थे। यह लोग व्हाट्सएप ग्रुप के अलावा टेलीग्राम एप से भी जुड़े थे। 9 नवंबर को गिरफ्तारियों के बाद कई लोगों ने ग्रुप छोड़ दिए।

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दिल्ली में हुए धमाके में जले वाहन - फोटो : पीटीआई
हिदायत कॉलोनी की गली सील एजेंसियों ने दिनभर की छानबीन 
आतंकी उमर की शहर में मौजूदगी की पुष्टि के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में कार्रवाई तेज कर दी है। उमर लगभग 10 दिन तक हिदायत कॉलोनी के जिस मकान में रुका था उस गली को रविवार सुबह पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। गली में रहने वाले सभी लोगों की का पुलिस ने सत्यापन किया।
 
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दिल्ली में धमाके के बाद जांच करती पुलिस टीम और सुरक्षाबल - फोटो : पीटीआई
रविवार को नूंह के एसपी राजेश कुमार ने भी उस मकान का निरीक्षण किया, जिसमें उमर ठहरा था। उमर को मकान उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने वाले शोएब और रिजवान को पुलिस ने हिरासत में लिया है। शोएब उस महिला का रिश्तेदार बताया जा रहा है, जिसके मकान में उमर किराए पर रहा। 
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