लाल किले के नजदीक सोमवार शाम कार में हुआ धमाका पुलवामा निवासी डॉ. उमर नबी ने ही अंजाम दिया था। घटना स्थल पर कार में चिथड़ों में मिली लाश से लिए डीएनए के नमूने का उमर की मां के डीएनए से मिलान हो गया है।
राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास सोमवार की शाम को हुए कार धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे हो रहे हैं। 10 नवंबर की शाम को हुए भीषण विस्फोट की जांच में अब तक का सबसे बड़ा बड़ा खुलासा हुआ है।
बुधवार देर रात पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने इस बात को साफ कर दिया है कि विस्फोटक से लदी आई 20 कार में मौजूद शख्स डॉक्टर उमर मोहम्मद ही था। घटना स्थल पर कार में चिथड़ों में मिली लाश से लिए डीएनए के नमूने का उमर की मां के डीएनए से मिलान हो गया है। इससे पुष्टि हो गई है कि उमर ने ही दिल्ली में कार धमाका किया था। धमाके में खुद भी मारा गया।
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धमाके से दहली दिल्ली
- फोटो : अमर उजाला
पुलवामा के संबूरा में रहने वाले डॉक्टर उमर के परिजनों से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पूछताछ भी की है। उमर की मां और भाई ने डीएनए सैंपल दिए थे, जो धमाके में इस्तेमाल कार के मलबे से मिले अवशेषों से मिल गया।
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Delhi Blast
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) व दिल्ली पुलिस को बुधवार देर रात डीएनए जांच की रिपोर्ट मिली। इससे साफ हो गया कि आई20 कार उमर नबी ही चला रहा था और धमाके में उसकी भी मौत हो गई। उसने आई20 में विस्फोटक लाद रखा था।
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Delhi Blast
- फोटो : अमर उजाला
जांच एजेंसियां मान रही हैं कि उमर वाहन से जुड़ा विस्फोटक यानी कार बम बनाने की कोशिश में जुटा था और इसके लिए उसने इंटरनेट से जानकारी जुटाई। 10 नवंबर को साथियों की गिरफ्तारी से डरकर उमर ने बौखलाहट में विस्फोट कर दिया।
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दिल्ली धमाके में अपनों को खोने का दर्द
- फोटो : पीटीआई
एक और घायल ने तोड़ा दम, 13 लोगों की हुई मौत
लाल किले के सामने हुए बम धमाके में एक और घायल ने गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, धमाके में 13 लोगों की जान जा चुकी है। मृतक का नाम बिलाल पुत्र गुलाम हसन बताया जा रहा है, जो कि दिल्ली से बाहर का रहने वाला है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों कहना है कि अस्पताल से गुरुवार सुबह सूचना मिली थी उसके बाद पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे।
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दिल्ली धमाके में अपनों को खोने का दर्द
- फोटो : पीटीआई
दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी 16 से ज्यादा घायल अस्पताल में भर्ती हैं, जो कि दिल्ली के विभिन्न अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस अधिकारी को कहना है कि इन सभी की हालत खतरे से बाहर है और सभी का इलाज किया जा रहा है।
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दिल्ली में धमाके के बाद जांच करती पुलिस टीम और सुरक्षाबल
- फोटो : पीटीआई
घटनास्थल से 40 से ज्यादा नमूने जुटाए
फोरेंसिक टीम ने विस्फोट स्थल से अब तक 40 से ज्यादा नमूने एकत्र किए हैं। एफएसएल ने नमूनों का विश्लेषण करने के लिए विशेष टीम का गठन किया है। विस्फोट के बाद से एफएसएल प्रयोगशाला 24 घंटे काम कर रही है। गौरतलब है कि मौके से दो कारतूस और दो अलग-अलग तरह के विस्फोटकों के नमूने भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
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इसी आई-20 कार में किया गया ब्लास्ट।
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट/ वीडियो ग्रैब
मस्जिद के पास पार्किंग में तीन घंटे तक खड़ी रही थी कार
इससे पहले, कार ब्लास्ट की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। धमाके वाली जगह के आसपास के सीसीटवी खंगालने पर नई जानकारी सामने आई थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, जिस हुंडई i20 कार में धमका हुआ है, वो वारदात से पहले एक मस्जिद के पास पार्किंग में करीब तीन घंटे तक खड़ी रही थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, कार ने 10 नवंबर की दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में प्रवेश किया। शाम 6:25 बजे तक उमर कार में ही था। पार्किंग से निकलने के कुछ देर बाद ही 6:52 बजे सुभाष मार्ग लाल बत्ती पर कार में ब्लास्ट हुआ। धमाके की चपेट में आसपास खड़े कई और वाहन भी आ गए।
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दिल्ली कार धमाका: इसी ट्रैफिक सिग्नल के पास आई-20 कार में हुआ विस्फोट
- फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब
विस्फोटक मिलने के कुछ घंटों बाद ही लालकिला धमाका हुआ
लाल किला बम धमाका फरीदाबाद के पास एक कश्मीरी डॉक्टर के किराये के मकान से लगभग 360 किलोग्राम संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट, हथियारों एवं गोलाबारूद का जखीरा बरामद होने के कुछ घंटों बाद हुआ।
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दिल्ली में हुए धमाके में जले वाहन
- फोटो : पीटीआई
हरियाणा पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर फरीदाबाद के धौज इलाके से डॉ. मुजम्मिल गनई को गिरफ्तार किया था और उसके किराये के मकान से विस्फोटक सामग्री, हथियार और टाइमर बरामद किए थे। दिल्ली पुलिस अधिकारी ने बताया कि यूपी एटीएस ने लखनऊ से जिस डा. परवेज अंसारी को पकड़ा है उससे भी लिंक सामने आए हैं।
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दिल्ली में हुए धमाके में जले वाहन
- फोटो : पीटीआई
गंभीर चोटों व ज्यादा खून बहने से गई जान
विस्फोट में मृत लोगों के पोस्टमार्टम में गंभीर चोटों का पता चला है। इसमें टूटी हड्डियां और सिर में चोट शामिल हैं। मौत के कारणों में गहरे घाव व अत्यधिक रक्तस्राव शामिल है। पोस्टमार्टम के दौरान शवों या कपड़ों पर किसी छर्रे के निशान नहीं मिले। ज्यादातर चोटें शरीर के ऊपरी हिस्से, सिर और सीने पर लगी थीं।
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद जांच करती टीम
- फोटो : पीटीआई
ब्लास्ट वेव से फटे कान के पर्दे, फेफड़े और आंत
लाल किले के पास हुए धमाके की तीव्रता इतनी अधिक रही कि ब्लास्ट वेव से कई लोगों के कान के पर्दे, फेफड़े और आंतें फट गईं। कुछ शवों में फेफड़ों, कान और पेट के भीतर ब्लास्ट वेव से नुकसान के संकेत मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि धमाका अत्यंत नजदीक से हुआ। किसी भी विस्फोट के समय अत्यधिक दाब और तापमान से उत्पन्न गैसीय लहर को ब्लास्ट वेव कहते हैं। इससे पता लगता है कि बम धमाका कितना भीषण था।
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दिल्ली में हुए धमाके के बाद वाहन के पुर्जे को लेकर जाता पुलिसकर्मी
- फोटो : पीटीआई
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि कई लोगों की मौत के पीछे की वजह धमाके की वजह से लगी गहरी चोट और अत्यधिक खून का बहाना रही। इस दौरान क्रॉस इंजरी पैटर्न भी देखा गया। धमाके के झटके से लोग दीवार या जमीन से टकरा गए। अधिकतर शवों में चोटें ऊपरी शरीर, सिर या छाती पर लगी थी।
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घटनास्थल को पर्दा लगाकर सील किया गया
- फोटो : पीटीआई
धमाके में मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाले खुलासे
जानकारी के अनुसार पोस्टमार्टम में शवों और कपड़ों पर स्प्लिंटर के ट्रेस नहीं मिले, लेकिन और ऐसे संकेत मिल हैं कि धमाके में संभवत कोई संशोधित विस्फोटक पदार्थ इस्तेमाल हुआ हो। विस्फोटक में कौन से केमिकल का इस्तेमाल हुआ, इसका पता लगाने के लिए फॉरेंसिक जां की जा रही है
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दिल्ली में धमाके के बाद जांच करती पुलिस टीम और सुरक्षाबल
- फोटो : पीटीआई
छर्रे आदि के निशान नहीं हैं
शवों पर विस्फोटकों के कोई छर्रे या निशान नहीं मिले। जांच एजेंसियां मौजूदा वक्त में विस्फोटक के किस्म और स्रोत की पुष्टि कर रही हैं। फोरेंसिक लैब में रासायनिक विश्लेषण जारी है। ज्यादातर शवों पर चोटें शरीर के ऊपरी हिस्से, सिर और छाती पर ज्यादा थीं।
दिल्ली में धमाके के बाद जांच करती पुलिस टीम और सुरक्षाबल
- फोटो : पीटीआई
प्रमुख बातें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- कान के पर्दे, फेफड़े और आंतें फटीं
- शवों की हड्डियां टूटीं, सिर पर चोट के निशान मिले।
- मृतकों के कान के पर्दे, फेफड़ेऔर आंतें फट गईं थीं।
- धमाके के झटके से लोग दीवार या जमीन से टकराए।
- गहरी चोट और ज्यादा खून बहने से मौत हुईं।