अचानक ही टूट गया दुखों का पहाड़
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चीखते-चिल्लाते हुए बेहोश बर्न विभाग में खुली आंख
लोकनायक अस्पताल के बर्न विभाग में भर्ती मुस्तफा भी उसी इमारत में सो रहे थे, जिसमें रविवार सुबह आग लगी थी। सोते-सोते धुएं की वजह से उनकी सांस फूलने लगी थी और वे घबराहट में नींद से जागे। उठकर बैठे तो सामने आग की लपटें दिखाई दीं। वे खुद को बचाने के लिए हड़बड़ाकर उठे और इधर-उधर भागने लगे, लेकिन तब तक आग काफी बढ़ चुकी थी। तीसरी मंजिल से नीचे उतरने के लिए वे बाहर निकले, लेकिन सीढ़ियों तक पहुंच नहीं पाए और बेहोश होकर गिर गए। इसके बाद उन्हें कुछ भी याद नहीं है। रविवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे उन्हें होश आया तो वे बर्न विभाग में भर्ती थे। आसपास के बिस्तरों पर पहचान के साथियों को देखकर वे घबरा गए। डॉक्टरों के अनुसार, मुस्तफा का करीब 10 फीसदी शरीर आग में झुलस गया है।