गुरु द्रोणाचार्य ने जहां कौरव और पांडवों को शिक्षा दी थी उसे हरियाणा सरकार ने नया नाम दे दिया लेकिन उसी गुरु का नगर दनकौर अपने उद्धार के लिए तरस रहा है। दनकौर में द्रोणाचार्य की प्राचीन प्रतिमा और मंदिर स्थित है। माना जाता है कि ये वही प्रतिमा है जिसे बनाकर एकलव्य ने धनुर्विद्या सीखी थी। द्रोण गौशाला समिति के प्रबंधक के मुताबिक अंग्रेजी शासन में यहां खुदाई के दौरान द्रोणाचार्य की प्रतिमा मिली थी।
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दनकौर में द्रोणाचार्य मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
एकलव्य द्वारा बनाई प्रतिमा खुदाई में मिलने पर ही द्रोणकौर नाम से इस नगर को बसाया गया। बाद में इसका नाम धनकौर और फिर दनकौर कर दिया। खुदाई वाले स्थान को द्रोण तालाब का नाम दिया गया। मान्यता है कि दनकौर में ही एकलव्य ने अपना अंगूठा गुरू दक्षिणा में दे दिया था। एकलव्य की प्रतिमा भी यहां स्थापित है।
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दनकौर में द्रोणाचार्य मंदिर
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पर्यटक स्थल बनाने के सरकार ने लगाए बोर्ड : द्रोणाचार्य मंदिर और तालाब को पर्यटक स्थल बनाने के मांग कई सालों से की जा रही है। पुरातत्व विभाग नेे 2013 में मंदिर और तालाब दोनों स्थलों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया था और साइन बोर्ड भी लगाए थे।
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दनकौर में द्रोणाचार्य मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर समिति के प्रबंधक नंदकिशोर गर्ग ने बताया कि जिले के मौजूदा सांसद और पर्यटन मंत्री डाक्टर महेश शर्मा ने कस्बे में आकर द्रोण नगरी दनकौर को पर्यटक स्थल बनाने की घोषणा की थी।