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CWG 2018: गोल्ड मेडल विजेता बजरंग के रंग में रंगेगा पूरा गांव, पिता ने की है ये खास प्लानिंग

Sat, 14 Apr 2018 10:34 AM IST
मनीष कुमार/अमर उजाला, बहादुरगढ़(हरियाणा)
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bajrang puniya
कॉमनवेल्थ गेम्स में कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले बजरंग की सफलता से उनके पिता काफी खुश हैं और उन्होंने बेटे का स्वागत का एक खास प्रोग्राम बना रखा है। उन्होंंने बताया है कि वो क्या करने वाले हैं...
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bajrang puniya - फोटो : pti
कॉमनवेल्थ गेम्स-2018 में देश को कुश्ती में गोल्ड मेडल जिताने वाले बहादुरगढ़ के लाल अर्जुन अवॉर्डी बजरंग पूनिया ने पढ़ाई से बचने के लिए कुश्ती की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती संघर्ष के बाद किसान का यह बेटा अब दुनिया में कुश्ती का सितारा बनकर चमक रहा है।
ऐसे हुई शुरुआत
गांव खुड्डन के किसान बलवान पूनिया के यहां 24 फरवरी 1994 में बजरंग का जन्म हुआ। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे बजरंग का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था। स्कूल से बचने के लिए अक्सर वह गांव के अखाड़े में पहुंच जाता। कुश्ती के प्रति उसकी रुचि देख पिता बलवान ने उसे अखाड़े में भेजना शुरू कर दिया। सात वर्ष की उम्र में बजरंग ने कुश्ती की एबीसीडी सीखनी शुरू की।
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bajrang puniya - फोटो : pti
इसके बाद करीब 10 वर्ष की आयु में परिजनों ने उसे छारा स्थित लाला दीवानचंद अखाड़े में छोड़ दिया। यहां गुरु आर्य वीरेंद्र के मार्गदर्शन में उसके खेल में निखार आया। महज 13 वर्ष की आयु में ही बजरंग ने सब जूनियर में ब्रांज और सिलवर मेडल जीते।

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bajrang puniya - फोटो : pti
इसके उपरांत बजरंग दिल्ली के छत्रसाल अखाड़े में चला गया। यहां गुरु महाबली सतपाल की देखरेख में ओलंपियन योगेश्वर के सहयोग से बजरंगी इंटरनेशनल चैंपियन बनकर उभरा। इसके बाद बजरंग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कामयाबी का सिलसिला शुरू हो गया।
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bajrang puniya - फोटो : pti
ईरानी और क्लिंच पसंदीदा दाव
24 वर्षीय बजरंग वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में 2 मेडल जीतने वाला एकमात्र भारतीय पहलवान है। श्रेष्ठ पहलवानी पर वर्ष-2015 में बजरंग को अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया। ईरानी और क्लिंच बजरंग के पसंदीदा दाव हैं। पहलवानी के अलावा बजरंग रेलवे में टीटीई है।
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bajrang puniya - फोटो : pti
पिता बोले, गोल्ड ल्यावैगा म्हारा छोरा
पिता बलवान ने कहा कि बजरंग ने अपनी मेहनत से उनका नाम रोशन किया है। जब भी कहीं बजरंग का जिक्र होता है तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। कॉमनवेल्थ गेम्स जीतने के बाद तो उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं है। बकौल बलवान, कॉमनवेल्थ गेम्स मैं इबकै उनका छोरा गोल्ड मेडल ल्याया है और इसकी उन्हें पूरी आस भी थी। जब जीत कै आवैगा तो पूरे गाम में खास जश्न मनावैंगे।
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