वाहन बीमा के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का यूपी एसटीएफ ने खुलासा किया है। एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को मामले में सरगना समेत चार लोगों को नोएडा के थाना सेक्टर-58 क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। ये लोग ऑनलाइन वाहन बीमा तलाशने वालों को फोन कर कम कीमत पर पॉलिसी कराने का झांसे देकर ठगते थे। एसटीएफ का अनुमान है कि आरोपी अब तक सैकड़ों वाहन मालिकों से लगभग ढाई करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। एसटीएफ गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की भी तलाश कर रही है।
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एसटीएफ में साइबर मामलों के विशेषज्ञ एसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह की टीम ने फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे सेक्टर-62 स्थित आम्रपाली चौक से चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान सत्यम एन्क्लेव साहिबाबाद गाजियाबाद निवासी अमित वर्मा, जोहरा पोस्ट मंसूर पुर मुजफ्फरनगर निवासी शिवम धीमान उर्फ विराट, डैया डी भीटी अंबेडकर नगर निवासी अरुण पाल और राधे श्याम पार्क राजेंद्र नगर साहिबाबाद गाजियाबाद निवासी ऋषभ त्यागी के रूप में हुई है। अमित गिरोह का सरगना है।
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यह हुई बरामदगी
आरोपियों की निशानदेही पर एसटीएफ ने लैपटॉप, छह टैबलेट, 20 मोबाइल फोन, 10 फर्जी बीमा कंपनियों की मुहर, चार एटीएम कार्ड, 6500 रुपये, जनरल इंश्योरेंस कंपनी का 500 पेज का उपभोक्ताओं का डाटा और काफी मात्रा में फर्जी बीमा कंपनियों के कवर नोट बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी साहिबाबाद में फर्जीवाड़े के लिए कॉल सेंटर चलाते थे। ये लोग केवल वाहनों का बीमा कराने के नाम पर ही ठगी करते थे।
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पूरे देश के वाहन मालिका को डाटा
त्रिवेणी सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि उनके पास पूरे देश के वाहन मालिकों का डाटा है। ये गोपनीय डाटा कहां से मिला, इसकी भी जांच की जा रही है। इसी डाटा से उन्हें पता चल जाता था कि कब किस गाड़ी का बीमा खत्म हो रहा है। इसके अलावा इन लोगों ने गूगल, जस्ट डायल और पॉलिसी बाजार जैसी वेबसाइट पर भी सदस्यता ले रखी है। इन पर बीमा संबंधी जानकारी सर्च करने वालों का डाटा भी आरोपियों को मिल जाता है। इसके बाद वह बीमा तलाश रहे संबंधित व्यक्ति को फोन कर कम कीमत पर पॉलिसी देने का झांसा देकर फंसाते थे।
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एचडीएफसी एर्गो ने की थी शिकायत
डॉ. त्रिवेणी ने बताया कि बीमा संबंधी फर्जीवाड़े की शिकायत एचडीएफसी एर्गों बीमा कंपनी द्वारा की गई थी। कंपनी ने थाना सेक्टर-58 में फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज कराई थी। बीमा कंपनी को 15 से अधिक बीमा धारकों ने उनके नाम पर फर्जी पॉलिसी बेचने की शिकायत की थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने यूपी पुलिस से शिकायत की थी। मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। अभी कुछ और बीमा कंपनियों से भी इस तरह केफर्जीवाड़े की शिकायतें मिल रही हैं।
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बीमा कंपनियों में काम कर चुके हैं आरोपी
एसटीएफ के मुताबिक आरोपी पूर्व में बीमा कंपनियों में काम कर चुके हैं। बीमा कंपनियों में इनके काम करने का अनुभव लगभग छह साल का है। इसके बाद इन्होंने ये फर्जीवाड़ा शुरू किया। बीमा कंपनियों में काम करने से आरोपियों को उनके कवर नोट और बीमा पॉलिसी संबंधित सभी तकनीकी जानकारियां थीं। इससे लोग आसानी से झांसे में फंस जाते थे।
क्लेम करने पर पता चलता था फर्जीवाड़े का
वाहन का बीमा एक वर्ष के लिए होता है। इस एक वर्ष में अगर वाहन चालक ने कोई क्लेम नहीं किया तो उसे पता ही नहीं चलेगा कि उसकी पॉलिसी फर्जी है। बीमा क्लेम करने पर ही पॉलिसी के फर्जी होने का पता चलता है। यही वजह है कि आरोपी इतनी बड़ी मात्रा में फर्जी पॉलिसी लोगों को बेच रहे हैं। इसके लिए आरोपी बजाज एलयांज, भारती एक्सा, एचडीएफसी एर्गो, फ्यूचर जेनेरली और टाटा एआईजी समेत कई नामी बीमा कंपनियों के फर्जी कवर नोट का इस्तेमाल करते थे।