खेल की दुनिया में दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित पद्मश्री खिलाड़ी सुनील डबास की बुधवार रात गाड़ी से कुचलकर हत्या करने की कोशिश की गई। हालांकि इस हमले में वो बाल-बाल बच गईं।
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sunil dabas
- फोटो : अमर उजाला
सुनील का कहना है कि बुधवार रात गुरुग्राम के लघु सचिवालय के पास कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें गाड़ी से कुचलने की कोशिश की गई। हमलावरों ने सौ की स्पीड से उनकी ओर गाड़ी दौड़ाई लेकिन वो किसी तरह खुद को बचा पाईं।
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सुनील का कहना है कि अगर वो एथलीट न होतीं तो खुद को बचा न पातीं। जब उनकी ओर गाड़ी आ रही थी तो डिवाइडर क्रॉस कर वो एक पेड़ के पीछे छिप गईं जिससे उनकी जान बची।
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हालांकि इसके बाद भी हमलावरों ने उन्हें जान से मारने के लिए उनकी गाड़ी को निशाना बनाया गया। वो किसी तरह वहां से भागती हुई पुलिस थाने पहुंची और मामले की शिकायत की।
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- फोटो : अमर उजाला
डबास का कहना है कि इस दौरान उन्होंने 20 मिनट तक लोगों को फोन कर मदद की गुहार की लेकिन कोई भी उन्हें बचाने नहीं आया। वो एक बाइक पर सवार हो अस्पताल पहुंची। फिलहाल मेदांता अस्पताल में उनका इलाज हो रहा है।
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कौन हैं सुनील डबास -
भारत की महिला कबड्डी टीम की कोच हैं डबास
2005 से वुमेन टीम इंडिया को कोचिंग दे रही हैं डबास
डबास की कोचिंग में टीम इंडिया 6 गोल्ड मेडल जीते, जिसमें एशियन गेम्स 2010 और वर्ल्डकप 2012 शामिल हैं
2012 में डबास को द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया
2014 में पद्मश्री अवॉर्ड से किया गया सम्मानित
गुरूग्राम के द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट (फिजिकल एजुकेशन)
2014 में कबड्डी में दमदार प्रदर्शन के लिए डबास को हरियाणा सरकार ने स्पोर्ट्स वुमेन अचिवर अवॉर्ड से सम्मानित किया
2016 की लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज, भारत की पहली महिला कोच जिन्हें पद्मश्री और द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिया गया
हरियाणा के झज्जर जिले में डबास का जन्म हुआ था
बीए, एमए और एमफिल के साथ कई डिग्री ले चुकी हैं डबास