पति-पत्नी का रिश्ता एक दूसरे का साथ निभाने और सुख-दुख बांटने का होता है लेकिन, राजीव और इंसिया ने अपने बचपन जो यादें साझा कीं उसके बारे में सुन कर किसी की रूह कांप जाएगी। असल में इनके संग हुए खौफनाक हादसे ने ही दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया जिसके बाद इन्होंने अपने बचपन में हुए अन्याय के खिलाफ एक दूसरे की आवाज बनने का फैसला किया। (स्टोरी व फोटो साभार: मेल टूडे)
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मेरे परिवार के ही एक सदस्य ने मेरा यौन शोषण किया
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इंसिया बताती हैं, 'जब मैं 10 वर्ष की थी तब मेरे परिवार के ही एक सदस्य ने मेरा यौन शोषण किया। मैं ये दर्द किसी से साझा न कर सकी, इस दर्द के साथ ही मैं बड़ी हुई। लेकिन जब मेरी दोस्ती मेरे पति से हुई तो मालूम चला कि उनके साथ भी बचपन में ऐसा ही हादसा हुआ है।'
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सभी मर्द बुरे होते हैं, लेकिन मैं गलत थी
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Molested
इंसिया बताती हैं, 'बचपन में हुए शोषण की वजह से मुझे लगता था कि सभी मर्द बुरे होते हैं, लेकिन मैं गलत थी। सभी मर्द अपराधी नहीं होते हैं। अजीब बात ये है कि भारत सरकार के पास ऐसे अपराध के रिकॉर्ड के नाम पर सिर्फ नाम मात्र का डाटा है। सरकार ने आखिरी बार 2007 में इसका सर्वे किया था। असल में लड़कों के साथ होने वाले यौन शोषण के मामलों पर सरकार का नजरिया बेहद लापरवाही भरा है।'
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में ऑनलाइन याचिका दायर की
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इस दंपत्ति ने अपने अनुभवों और सरकारी उदासीनता को देखते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाने की सोची और मेनका गांधी की देखरेख में आने वाले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में ऑनलाइन याचिका दायर की।
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शोषण करने वाला कोई अनजान नहीं बल्कि अपना ही कोई होता है
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इन दोनों ने अपने-अपने बचपन में यौन शोषण झेला है। इससे भी ज्यादा दुखदायक ये है कि भारत में हर रोज कई बच्चे ऐसे अपराध का शिकार होते हैं जहां शोषण करने वाला कोई अनजान नहीं बल्कि अपना ही कोई होता है। इस तेज रफ्तार जिंदगी में ऐसी हजारों आवाजें खो जाती हैं, लेकिन इस दंपत्ति ने एक-दूसरे की आवाज व हौसला बनकर आगे आने का फैसला किया ताकि बचपन में इन्होंने जो कुछ सहा है, वह किसी और को न सहना पड़े।
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अपने आस-पास के समाज को देखकर
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इंसिया 17 साल के बेटे की मां हैं और अपने अनुभव के बारे में कहती हैं, 'कोई भी पुरुष मां के पेट से ही महिलाओं के प्रति हिंसक या असंवेदनशील नहीं होता है। दरअसल वह अपने आस-पास के समाज को देखकर ये सब सीखता है।'
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'अगर हमारे समाज में बच्चे ही असुरक्षित हैं तो एक वयस्क युवती कैसे सुरक्षित महसूस करेंगी।'
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इंसिया के पति राजीव ने बताया कि जब वो महज पांच साल के थे तब किसी करीबी ने ही उनका यौन शोषण किया। ये शोषण महीनों तक चला। हालांकि ज्यादातर बार ये सब एक या दो मिनट तक ही चला लेकिन इतना ही अनुभव उनके लिए बेहद पीड़ा देने वाला होता था। 44 वर्षीय इंसिया बताती हैं, 'अगर हमारे समाज में बच्चे ही असुरक्षित हैं तो एक वयस्क युवती कैसे सुरक्षित महसूस करेंगी।'
इंसिया महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में दी अपनी याचिका में लिखती हैंए 'मेरे और मेरे पति के साथ हुए शोषण से उभरने की प्रक्रिया बहुत कष्टकारी रही है। उनकी और अपने अन्य दोस्तों की कहानी सुनकर हमें मालूम हुआ कि लड़कों का भी यौन शोषण होता है। लाखो पुरुष आज भी बचपन में हुए शोषण के दर्द को अकेले सहकर जी रहे हैं। फिर ऐसी कहानियां आजतक समाज को क्यों नहीं बतायी गई?'