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ससुराल गया था बुलंदशहर गैंगरेप का आरोपी, रास्ते में दिया वारदात को अंजाम

Tue, 02 Aug 2016 06:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
मां-बेटी से गैंगरेप करने के आरोपी जबर सिंह अपनी पत्नी को लाने के लिए ससुराल गया था। इसी दौरान घटना को अंजाम दिया। पिछले कई माह से खुर्जा क्षेत्र में पशु चोरी की वारदात में शामिल रहा। वह एक बार जेल भी जा चुका है। हालांकि रबूपुरा क्षेत्र में उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। बुलंदशहर में नेशनल हाइवे-91 पर गैंगरेप के आरोपी जबर सिंह मूल रूप से रबूपुरा के नंगला श्रीगोपाल का रहने वाला है। उसके पिता रामू उर्फ रामकुमार की कस्बे के मुख्य तिराहे पर ही टायर पंक्चर की दुकान है। 
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। जबर कोई काम नहीं करता। उसकी बुरी आदतों के चलते ही गांव के लोग उससे परेशान रहते हैं। उसकी शादी ग्राम ढाकर में हुई थी। 30 जुलाई को जबर पत्नी को लाने के लिए ऑटो से ससुराल गया था। गैंगरेप की घटना के बाद इसके पिता रामू को बुलंदशहर पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, लेकिन पूछताछ के बाद छोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक वह पिछले कुछ माह से पशु चोरी की वारदात को अंजाम देता रहा है। छह माह पहले खुर्जा में इसको पशु चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। एक माह पहले रबूपुरा के रामजीलाल से झूठ बोलकर टेंपो को किराये पर ले गया था। 
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
गैंगरेप के आरोप में जेल भेजे गए आरोपी रईसुद्दीन उर्फ रईस के परिजनों ने पुलिस के खुलासे पर सवाल खड़े किए हैं। परिजन और गांवों ने खुलासे को झूठा एवं बेबुनियाद बताया और एसएसपी दफ्तर पर जमकर प्रदर्शन और हंगामा किया। गांव वालों का कहना है कि रईस का कोई क्राइम रिकार्ड नहीं है। पुलिस ने उसे रविवार रात को घर से उठाया और पूछताछ के बाद छोड़ देने की बात कही थी। वहीं, रईस के परिजनों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय और आईजी से न्याय की गुहार लगाई है। 

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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
सोमवार दोपहर करीब दो बजे रईसुददीन उर्फ रईस के परिजन एसएसपी दफ्तर पहुंचे। परिजनों के साथ करीब 200 की तादाद में गांव वाले भी थे। गांव वालों ने रईस को बेगुनाह बताते हुए एसएसपी दफ्तर के बाहर हंगामा और नारेबाजी की। गांव वालों ने कहा कि पुलिस वाहवाही लूटने के लिए बेगुनाहों का फंसा रही है। रईस के बुजुर्ग मां-बाप के अलावा पत्नी, पांच बच्चे व एक दिव्यांग बहन है। रईस वैर रेलवे स्टेशन पर माल गाड़ियों से सीमेंट और खाद की बोरियां उतारने का काम करता है। रईस शनिवार को भी काम पर गया था। इसका रिकार्ड वैर स्टेशन पर मौजूद है। रात में वह घर पर सोया हुआ था। करीब तीन तीन जीपों में सवार पुलिसकर्मी घर पहुंचे और रईस को चौकी पर उठा लाए। 
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
रविवार को अखबार से उनको यह जानकारी मिली। पुलिस ने रईस से परिजनों को नही मिलने दिया। रईस को पुलिस ने बेरहमी से पीटा और झूठा केस लगा दिया। परिजनों के मुताबिक पुलिस असली गुनहगारों को तो पकड़ न सकी और बेगुनाहों को फंसा कर जेल भेज दिया गया। रईस के चाचा मंजूर अहमद ने बताया कि रईस की दिव्यांग बहन की बेटी की शादी गांव वालों ने चंदा जमा कर की थी। यदि रईस लुटेरा होता तो उसके पास माल दौलत की कमी नहीं होती। 
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
पुलिस को कहां से मिला रईस का सुराग
बड़ा सवाल यह है कि पुलिस को रईसुद्दीन का सुराग कहां से मिला। डीजीपी ने बताया कि फोटो देखकर पीड़ित महिलाओं ने रईसुद्दीन की पहचान की थी। बता दें कि जब रईसुद्दीन की कोई क्राइम हिस्ट्री ही नहीं तो पुलिस के पास रईसुद्दीन को फोटो कैसे पहुंची। रईस के चाचा के मुताबिक 20 दिन पूर्व पास के ढाबे पर लूट की घटना को अंजाम दिया गया था।  जहां लूटपाट हुई थी उस स्थान पर खोखे से रईसुद्दीन ने बीड़ी और गुटखा खरीदा था। आसपास के लोगों ने शक की बिनाह पर पुलिस को रईसुद्दीन का नाम बता दिया।
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने रईसुद्दीन पर पूछताछ जरूर की, मगर लूट का लिंक नहीं मिलने पर छोड़ दिया। परिजनों के मुताबिक पुलिस पर गैंगरेप खोलने का दबाव था। इसी के चलते रईसुद्दीन को फंसा दिया गया। रईसुददीन के पिता ने डीआईजी से न्याय की गुहार लगाई है। 
चंदा जमा कर लड़ा जाएगा रईस का केस- रईस की गिरफ्तारी को लेकर गांव वाले एकजुट हो गए हैं। गांव वालों ने कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी अमर उजाला से कही है। कानूनी लड़ाई के लिए गांव वाले चंदा जमा करेंगे। सवाल यह है कि अगर रईस बदमाश प्रवृत्ति का व्यक्ति है तो गांव वाले उसके व उसके परिवार साथ हमदर्दी का रुख क्यों अपनाए हुए हैं। 
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बुलंदशहर गैंगरेप - फोटो : अमर उजाला
सर्विलांस पर क्यों नहीं मोबाइल- रईसुद्दीन मोबाइल फोन रखता था। रईस की लोकेशन जानने के लिए पुलिस को मोबाइल सर्विलांस पर लगाना चाहिए था ताकि सही लोकेशन की जानकारी हो जाए।
'रईस मजदूरी करता था और समय-समय पर बावरिया गिरोह के सदस्यों के साथ आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। उसी ने गिरोह के सदस्यों को दोस्तपुर के पास घटना की जानकारी दी थी। पीड़िता ने रईसुद्दीन की पहचान की है। परिवार के आरोप गलत हैं।'
- लक्ष्मी सिंह, डीआईजी, मेरठ
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