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जो काम सरकारें दशकों में न कर पाईं, लॉकडाउन ने 10 दिन में कर दिखाया, यमुना की ये तस्वीरें हैं गवाह

Mon, 06 Apr 2020 10:49 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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लॉकडाउन के बाद यमुना नदी हुई निर्मल (बाईं तस्वीर वर्तमान की है और दाईं तस्वीर लॉकडाउन के पहले की है) - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं कि हर चीज के दो पहलू होते हैं, एक अच्छा और एक बुरा। इसी तरह देश में 21 दिन का जो लॉकडाउन है उसकी वजह से देशवासियों को अपने घरों में रहने को मजबूर होना पड़ा है, देशभर में फैक्टरियां बंद हो गई हैं जिससे कई लोगों पर बेरोजगारी का संकट भी आ गया है। लेकिन इसी लॉकडाउन की वजह से प्रकृति अपने असली स्वरूप में आ गई है। जहां एक ओर देश के सभी राज्यों व शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है, वहीं गंगा और यमुना जैसी बेहद प्रदूषित हो चुकी नदियां भी साफ दिखने लगी हैं। जहां पहले इनका पानी काला-गंदा दिखता था, वहां अब यह पानी स्वच्छ और निर्मल दिखाई देता है। हमारी इस खबर में जानिए कि कैसे नदियां खुद साफ हो गई हैं और इन्होंने सरकारों को वो मॉडल दिया है जिससे इन्हें आगे भी साफ रखने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं....
 
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निर्मल हुई यमुना - फोटो : अमर उजाला
यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार के प्रयास बीते करीब तीन दशकों से बेशक कामयाब न हो सके हों, लेकिन 10 दिन के लॉकडाउन के दौरान नदी को खुद ही अपने को साफ कर लिया है। नदी का जल नीला होने साथ ही नजदीक जाने पर उसकी तली भी इस वक्त दिख रही है। लॉकडाउन से पहले काले पानी से लबालब नदी दूर से नाले सरीखी नजर आती थी। यानी यमुना ने खुद को पुनर्जीवित करने का अपना मॉडल पेश कर दिया है।
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लॉकडाउन से पहले वाली प्रदूषित यमुना - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस से पैदा हुए संकट के इस दौर में विशेषज्ञ नदी की अपने स्तर पर की जाने वाली साफ-सफाई को भविष्य के मॉडल के तौर पर देख रहे हैं, जिसके सहारे सभी नदियों को पुनर्जीवित करना संभव हो सकेगा।

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निर्मल हुई यमुना - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र व राज्य सरकारों ने लॉकडाउन के दौरान नदी के इस नैसर्गिक मॉडल को समझ लिया और उसके अनुसार योजनाएं बनाईं तो बगैर बड़े पैमाने पर मानवीय व वित्तीय संसाधन लगाए नदियों को साफ-सुथरा रखा जा सकेगा। इससे देश की बड़ी आबादी की जल संकट की समस्या भी दूर होगी।
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दिल्ली में साफ हुई हवा, लॉकडाउन के बाद साफ नीला दिख रहा आसमान - फोटो : अमर उजाला
उधर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली जल बोर्ड इस तरह के बदलावों का अध्ययन करने की योजना तैयार कर रहा है। सीपीसीबी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि बोर्ड जल्द ही नदी से सैंपल लेगा। इसके आधार पर देखा जाएगा कि लॉकडाउन का नदी की सेहत पर असर क्या रहा है।
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निर्मल हुई यमुना - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, इस तरह की एक स्टडी बोर्ड वायु की गुणवत्ता पर पहले से कर रहा है। दूसरी तरफ, दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नदी से सैंपल लिया जाएगा। इसके आधार पर बोर्ड भविष्य में नदी को स्वच्छ रखने का खाका तैयार करेगा।
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निर्मल हुई यमुना - फोटो : अमर उजाला
औद्योगिक वेस्ट और सीवर का लोड नहीं होने का परिणाम
इस वक्त औद्योगिक वेस्ट शून्य है। फिर, बाजार बंद होने से सीवर का लोड भी कम हुआ है। साथ ही, नदी के जल में इंसानों का दखल कम है। इससे नदी अपनी गाद को तली तक छोड़ बह रही है। इसका मिला-जुला असर साफ-सुथरे पानी के तौर पर दिख रहा है। नदी के खुद को पुनर्जीवित करने के नैसर्गिक मॉडल का भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकता है। नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन में कॉस्ट्रक्टिव वेटलैंड बनाकर दिल्ली में नदी की बड़ी समस्या दूर की जा सकेगी।- फैयाज खुदसर, इंचार्ज, यमुना बॉयोडायवर्सिटी पार्क।

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निर्मल हुई यमुना - फोटो : अमर उजाला
करीब एक लाख फैक्टरियां बंद, नहीं निकल रहा कचरा
दिल्ली के 33 औद्योगिक क्षेत्रों में एक लाख से ज्यादा फैक्टरियां हैं। हालांकि यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगे हुए हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में औद्योगिक कचरा सीधे नालों में छोड़ दिया जाता है। इससे नदी प्रदूषित होती है। इस वक्त औद्योगिक कचरा एकदम नहीं निकल रहा है। इससे नदी की सेहत बेहतर हुई है। - एसके माहेश्वरी, उद्यमी, पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया

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निर्मल हुई यमुना - फोटो : पीटीआई
भविष्य के लिए बेसलाइन हो सकते हैं 21 दिन
करीब तीन दशक पहले यमुना को साफ करने के लिए यमुना एक्शन प्लान लागू हुआ था। इस बीच करोड़ों-करोड़ रुपये इस पर खर्च भी किए गए, लेकिन नदी बद से बदतर होती गई। पिछले दस दिन के लॉकडाउन ने इसे साफ-सुथरा कर दिया है। सरकारों व उसकी एजेसियों के लिए यह 21 दिन बेसलाइन की तरह हो सकते हैं। केवल यमुना ही नहीं, पूरे देश की नदियों का पानी इस बीच साफ हुआ है। - प्रशांत गुंजन, महासचिव, ईकोस्फेयर
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निर्मल हुई यमुना - फोटो : पीटीआई
आंकड़ों में यमुना
  • नदी की कुल लंबाई का महज दो फीसदी हिस्सा दिल्ली में होता है प्रवाहित, लेकिन 70 फीसदी प्रदूषण दिल्ली से।
  • दिल्ली से निकलता है 3267 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) सीवर, जबकि शोधन क्षमता करीब 2400 एमएलडी।
  • शोधन क्षमता के 37 फीसदी का नहीं होता इस्तेमाल।
  • 60-70 एमएलडी होता है औद्योगिक वेस्ट।
  • दिल्ली के 16 नालों से यमुना में पहुंचती है गंदगी, नजफगढ़ और शाहदरा नाले का बड़ा रोल।
  • नजफगढ़ नाले से आता है 60 फीसदी सीवेज और 45 फीसदी बीओडी।
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