निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले के दोषी विनय शर्मा की दया याचिका पर नया विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को विनय शर्मा ने अपने वकील के मार्फत राष्ट्रपति के पास एक याचिका भेजकर कहा है कि उसने कोई दया याचिका नहीं लगाई है। ऐसे में गृह मंत्रालय की ओर से भेजी गई दया याचिका वापस की जाए। उधर, जेल प्रशासन का कहना है कि विनय शर्मा की तरफ से भेजी गई दया याचिका को ही उसने राष्ट्रपति के पास भेजा है।
विनय के वकील एपी सिंह ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बाद करीब तीन बजे वह जेल में अपने मुवक्किल से मिलने गए थे। बातचीत में दया याचिका की बात आई तो विनय ने किसी तरह की दया याचिका भेजने से इनकार किया। यही नहीं, उसने इस बारे में एक पत्र भी लिखा है। सिंह ने कहा कि विनय शर्मा की सहमति से एक याचिका राष्ट्रपति के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय, उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार को शनिवार को भेज दी है।
उधर, जेल के अतिरिक्त महानिरीक्षक राजकुमार ने विनय के वकील के दावे को झूठा करार देते हुए कहा कि चारों दोषियों को दया याचिका भेजे जाने के बारे में नोटिस दिया गया था। इसके जवाब में विनय ने दया याचिका लगाई थी।
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विनय शर्मा को मजिस्ट्रेट से ही मिल सकती है राहत
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- फोटो : अमर उजाला
जेल प्रशासन और निर्भया मामले में दोषी विनय शर्मा के विरोधाभासी बयानों के बीच कानून विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल राष्ट्रपति के पास पहुंची दया याचिका ही मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा का कहना है कि दया याचिका पर जेल प्रशासन की मुहर होती है। यह कानूनी दस्तावेज है।
किसी व्यक्ति का कोई निजी पत्र इसके ऊपर नहीं होगा। हालांकि, एक विकल्प विनय शर्मा के पास मौजूद है। अगर वह दया याचिका वापस लेना चाहता है तो मजिस्ट्रेट के पास जाकर कबूलनामा देना होगा। इसके बाद ही विनय की नई याचिका पर विचार किया जा सकता है।
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दया याचिका राष्ट्रपति के पास पहुंची, फांसी की तैयारी शुरू
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- फोटो : अमर उजाला
विनय शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति के पास पहुंचते ही तिहाड़ जेल प्रशासन ने फांसी की तैयारी शुरू कर दी है। याचिका खारिज होते ही अदालत से डेथ वारंट लिया जाएगा, जिससे फांसी देने का रास्ता साफ हो जाएगा। तिहाड़ जेल के पास अपना जल्लाद नहीं है। इसलिए जेल प्रशासन ने दक्षिण भारत और उत्तर प्रदेश की कई जेलों के अधिकारियों ने बातचीत शुरू कर दी है।
जेल सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका खारिज होते ही फांसी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अदालत के डेथ वारंट के बाद तिहाड़ में दोषियों को फांसी दी जाएगी। इससे पहले, अफजल गुरु को फांसी देने के समय भी तिहाड़ जेल के पास कोई जल्लाद नहीं था। उस समय जेल अधिकारियों में से किसी एक ने फांसी दी थी।
सूत्रों का कहना है कि मौजूदा हालात में जेल प्रशासन किसी भी जल्लाद की नियुक्ति नहीं कर सकता। फांसी के लिए उसे किसी अन्य जेल से ही जल्लाद को बुलाना पड़ेगा। जेल के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि फांसी कभी-कभार दी जाती है। ऐसे में जल्लाद की स्थायी नियुक्ति की जरूरत नहीं पड़ती। तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया कि जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों के जेलों से जल्लाद को बुलाया जाएगा। दया याचिका खारिज होने के बाद ही इस पर कोई बातचीत होगी।
दोषियों पर सीसीटीवी कैमरे से रखी जा रही है नजर
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जेल सूत्रों का कहना है कि दया याचिका भेजे जाने के बाद से ही निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले के चारों दोषियों पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है। जेल के कर्मचारी उनके पास जाकर उनसे बातचीत कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि दोषियों अक्षय, विनय, पवन और मुकेश के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा है। हालांकि विनय राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने के मामले में जेल अधिकारियों से लगातार बातचीत कर रहा है।
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निर्भया के माता-पिता ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
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निर्भया के माता-पिता ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर सामूहिक दुष्कर्म के दोषी विनय शर्मा की दया याचिका खारिज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की दया याचिका स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। क्योंकि यह बेहद खतरनाक है। ऐसे दरिंदों को समाज में खुला नहीं छोड़ा जा सकता।
निर्भया के पिता का कहना है कि बेटी से दरिंदगी करने वाले विनय शर्मा ने अपना जीवन बचाने के लिए राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई है। इसीलिए उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विनय शर्मा की याचिका स्वीकार न करने का आग्रह किया है।
उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति उनकी मांग को स्वीकार करते हुए विनय की दया याचिका खारिज कर देंगे। निर्भया के पिता का कहना है कि राष्ट्रपति को पत्र में लिखा है कि यह दया याचिका मौत की सजा से बचने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए जान-बूझकर किया गया प्रयास है।
बता दें कि विनय की दया याचिका केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजी है। इससे पहले, दिल्ली सरकार के सामने दया याचिका लगाई गई थी। इसे खारिज करते हुए दिल्ली सरकार ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेज दी थी।