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जानिए प्रियंका गांधी के बारे में 10 रोचक बातें, इसलिए इन्हें कांग्रेस में कहते हैं 'भइयाजी'

Wed, 23 Jan 2019 01:32 PM IST
पूजा त्रिपाठी बीबीसी, नई दिल्ली
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priyanka gandhi - फोटो : social media
नेहरू-गांधी परिवार की युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रियंका गांधी(Priyanka Gandhi) के राजनीति में प्रवेश का औपचारिक एलान आज कर दिया गया है। उन्हें पार्टी महासचिव पद के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया है। उनके राजनीति में प्रवेश का पार्टी के अंदर और बाहर लंबे समय से इंतजार हो रहा था। प्रियंका की इस एंट्री से वो लोग काफी खुश हैं जिनका मानना है कि अगर वह पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगी तो शायद अभी से ज्यादा सफलता मिलेगी और कांग्रेस अपना पुराना गौरव फिर से हासिल कर सकेगी। इस फैसले से देश की सबसे पुरानी(ग्रैंड ओल्ड पार्टी) कांग्रेस पार्टी में फिर से जोश का संचार होने की पूरी उम्मीद की जा रही है। ऐसे में आपको प्रियंका के बारे में एक खास बात बताते हैं कि उन्हें भईयाजी कहकर भी पुकारा जाता है। क्या है इसकी वजह और उनके बारे में कई ऐसी दिलचस्प बाते हैं जो बहुत कम लोगों को पता हैं। पढ़ें इस स्टोरी में वही खास बातें....
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priyanka gandhi - फोटो : social media
बचपन में राजीव और सोनिया के साथ अमेठी जाने पर प्रियंका गांधी के बाल हमेशा से छोटे रहते थे और गांव में ज्यादातर लोग राहुल की तरह उन्हें भी भइया बुलाने लगे जो बाद में बदल कर भइयाजी हो गया। गांधी परिवार का दर्जा अमेठी रायबरेली में किसी मिथक से कम नहीं। लोग सालों बाद भी उस पल के बारे में बताना नहीं भूलते जो उन्होंने गांधी परिवार के सदस्योम के साथ साझा किये थे। 
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priyanka gandhi - फोटो : social media
सब अपनी बातें ऐसे बताते हैं जैसे उनके घर या मुहल्ले का कोई सदस्य हो। जैसे प्रियंका का रूटीन, उनका खानपान और उनका लोक व्यवहार भी। रायबरेली से चंद किलोमीटर दूर भुएमऊ गेस्ट हाउस में प्रियंका गांधी का दिन सुबह छह बजे ट्रेडमिल पर थोड़ी मशक्कत और फिर ज्यादा समय के लिए योग से शुरू होता है। पोहे, ब्रेड या कॉर्नफ्लेक्स के नाश्ते के बाद 'भइयाजी' यानी प्रियंका लोगों से मिलना शुरू करती हैं और उनके लंच का समय तय नहीं रहता। भाई राहुल गांधी से थोड़ा अलग।

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priyanka gandhi - फोटो : social media
रोटी या परांठे के साथ सब्ज़ी और दाल लेकिन साथ में आम/नींबू का अचार तो रहना ही चाहिए। उन्हें और पति रॉबर्ट वाड्रा को मुग़लई खाना बेहद पसंद है। वर्ष 2004 में रायबरेली चुनाव प्रचार प्रियंका की निगरानी में जारी था। उन्होंने परिवार के एक पुराने करीबी जो अमेठी में थे उनसे फोन पर कुछ फरमाइशें कीं जिनमें गलावटी कबाब, बिरयानी और कोरमा शामिल था।
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priyanka gandhi - फोटो : अमर उजाला
चंद घंटों बाद खाना पैक होकर गेस्ट हाउस पहुंचा जहां प्रियंका और रॉबर्ट ने खाने के बाद बचा हुआ खाना अपनी शाम वाली दिल्ली की फ्लाइट के लिए रख भी लिया। वैसे मलाई-चाप और सफेद रसगुल्लों का भी शौक रखने वाली प्रियंका रात को सोने से पहले भुएमऊ या मुंशीगंज गेस्ट हाऊस के कई चक्कर लगाना नहीं भूलतीं। अब उनके बच्चे भी गाहे बगाहे यहां दिखाई दे जाते हैं। दिल्ली में प्रियंका गांधी ने अपने परिवार को मीडिया की नज़र से काफ़ी हद तक बचा कर रखा है। पर यहां ऐसा नहीं है।
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priyanka gandhi - फोटो : pti
लगभग 2004 के बाद से प्रियंका के प्रचार करने की शुरूआत हुई थी। जब प्रियंका बतौर मेहमान रायबरेली निवासी रमेश बहादुर सिंह के घर पर एक महीने ठहरी थीं। रमेश को वो दिन आज भी याद है, "प्रियंका प्रचार करने अकेले निकलतीं थी और देर रात लौट पातीं थीं। दोनों बच्चे घर में आया के साथ रहते थे। उस दिन वे जल्दी लौट आईं और मुझसे बोलीं कि बच्चों को रिक्शे की सैर करानी है इसलिए दो रिक्शे मिल सकते हैं क्या?"
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी - फोटो : Amar Ujala Graphics
"जैसे ही रिक्शे आए वे बच्चों के साथ एक पर बैठकर बाहर निकल चलीं और भौचक्के एसपीजी वाले पीछे भागे। आधे घंटे बाद वे लौटीं और रिक्शा वालों को 50 रुपए का नोट देकर हंसते हुए भीतर लौट आईं।" 2016 में जब उनके बेटे रेहान 14 वर्ष के थे तो अपने दोस्तों के साथ मामा राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र अमेठी पहुंचे थे। रेहान और उनके दोस्तों ने दाल, चावल और सब्जी खाई। खुले में चारपाई पर सोए और मच्छरदानी का भी इस्तेमाल किया।

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priyanka gandhi - फोटो : social media
पहले उनके साथ इन क्षेत्रों में काम कर चुके कुछ व्यक्ति ये तो मानते हैं कि प्रियंका की शख्सियत बहुत सुलझी हुई है लेकिन उनके मन में इसकी गंभीरता को लेकर संदेह भी है। ऐसे ही नजदीकी रहे एक मुस्लिम परिवार की रसोई से प्रियंका के लिए यदा-कदा मुगलई खाना, जिसमें कोरमा-बिरयानी शामिल है, जाता रहता था। एक दिन इन्हीं सज्जन ने कहा, "भइयाजी को इस बात की याद दिलाई कि उनकी तहसील से गुजरने वाली एक मशहूर ट्रेन के स्टॉपेज को वादे के बाद भी अमल में नहीं लाया गया।"

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priyanka gandhi - फोटो : social media
प्रियंका ने बात भी सुनी और काम न होने पर अपनी नाराजगी भी जताई। लेकिन अगले तीन साल प्रियंका के इर्द-इर्द रहने वालों ने कथित तौर पर इन सज्जन को 'भइयाजी' से मिलने का एपॉइंटमेंट नहीं लेने दिया। 2016 तक भी ट्रेन नहीं रुकती थी वहां पर। तीन वर्ष बाद यही शख्स अपने बेटे की शादी का कार्ड लेकर प्रियंका के दिल्ली आवास पहुंचे। कोरमा और कबाब इस बार भी साथ आए थे। प्रियंका ने हाल भी पूछा और मिलीं भी। लेकिन इन्हें इस बात का मलाल है कि उन्होंने ये नहीं पूछा कि तीन साल कहां रहे।

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priyanka gandhi - फोटो : अमर उजाला
जाहिर है, उनके शुभचिंतक उनकी तारीफ़ करते नहीं थकते और आलोचक उनके इस सहज अंदाज को बनावटी बताते हैं। कांग्रेस के एक साधारण कार्यकर्ता मंसूर अहमद खान जैसे लोग कहते हैं कि प्रियंका उनके लिए भगवान से कम नहीं हैं। उन्होंने बताया, "राहुल गांधी का 2009 का चुनाव प्रचार चल रहा था। अचानक मेरी तबीयत खराब हुई और मैं बेहोश हो गया। तीन दिन बाद मुझे होश आया तो मैं दिल्ली के बत्रा अस्पताल में था, जहां बताया गया कि मेरी किडनी खराब हो चुकी थी।"

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priyanka gandhi - फोटो : pti
"हफ्ते भर के इलाज के बाद डरते हुए मैंने डॉक्टर से कहा, ग़रीब आदमी हूं यहां इलाज नहीं करा पाऊंगा। डॉक्टर ने मुझे डांटते हुए कहा कि तुम्हारे ऊपर 11 लाख रुपए का इलाज हो चुका है और तुम अपने को ग़रीब बता रहे हो।" मसूद बताते हैं कि प्रियंका के आदेश पर कांग्रेस के वरिष्ठ लोग उन्हें देखने बत्रा अस्पताल जाते रहे।
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priyanka gandhi - फोटो : social media
स्थानीय लोग इस बात पर जोर देते हैं कि प्रियंका की याददाश्त बहुत अच्छी है और वे सभी को नाम से बुलाती हैं। हालांकि रायबरेली या अमेठी में कुछ पुराने कांग्रेसी भी हैं जो ये मानते हैं कि प्रियंका की शख्सियत भले ही इंदिरा गांधी की तरह दिखती हो लेकिन प्रियंका में अपनी दादी की तरह अपने लोगों के प्रति गंभीर लगाव नहीं दिखता। एक पुराने सहयोगी ने बताया, "बतौर प्रधानमंत्री भी इंदिरा गांधी हर दो-चार महीने में रायबरेली पहुंच जाया करतीं थीं। राजीव जी को भी अमेठी के लोगों से विशेष प्रेम था। लेकिन प्रियंका चुनाव के समय ज्यादा दिखतीं हैं।"
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