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तो क्या अब आप की सैलरी पर पड़ेगी GST की मार, अपना टैक्स कम करने को कंपनियां उठाएंगी ये कदम!

Tue, 17 Apr 2018 11:21 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
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Salary Bonus
तो क्या अब जीएसटी का असर आपकी सैलरी पर भी पड़ने वाला है? क्या अब आपकी सैलरी कम और टैक्स बोझ बढ़ जाएगा? इन सब सवालों का जवाब हमारी इस स्टोरी में है।
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salary
इकोनॉमिक टाइम्स के एक दावे के अनुसार जीएसटी के असर के चलते पूरे देश में कंपनियां अपने सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करने वाली हैं जो कर्मचारियों को काफी भारी पड़ेगा। दरअसल कंपनियां जीएसटी के असर के चलते कर्मचारियों के सैलरी ब्रेकअप में बदलाव कर सकती हैं।
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डेमो पिक
जीएसटी के असर की वजह से शॉपिंग और रेस्टोरेंट बिल के बाद इसे जनता को लगने वाला सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। हाउस रेंट, टेलिफोन बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्टेशन और मेडिकल बिल जैसे सैलरी ब्रेकअप अगर जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे तो कंपनियों को कर्मचारियों की सैलरी नए सिरे से निर्धारित करनी होगी।

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जीएसटी की आड़ में चाेरी
कहा जा रहा है कि टैक्स जानकारों ने तो कंपनियों को सलाह भी देनी शुरू कर दी है कि वह अपने एचआर डिपार्टमेंट को कर्मचारियों के सैलरी ब्रेकअप को नए सिरे से समझने के लिए कहे। गौरतलब है कि अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग(एएआर) के हाल में दिए एक फैसले के बाद अब कंपनियां अपनी टैक्स देनदारी बचाने के लिए कर्मचारियों के सैलरी ब्रेकअप पर काम कर रही हैं।
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डेमाे पिक
गौरतलब है कि एएआर ने एक खास मामले में फैसला दिया है। यह मामला था कि कैंटीन चार्जेस के नाम पर कर्मचारी की सैलरी से कटौती जीएसटी के दायरे में होगी या नहीं। इसमें एएआर ने फैसला दिया है कि कैंटीन चार्जेस के नाम पर जो सैलरी काटी जाती है वो जीएसटी के अधीन आएगी। अब जानकारों का मानना है कि इसी तरह से कंपनी द्वारा कर्मचारी की सैलरी से की जाने वाली कटौती जीएसटी के दायरे में आ जाएगी।
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
टैक्स जानकारों के अनुसार कर्मचारियों की सैलरी बहुत से ऐसे ब्रेकअप होते हैं जिनके बदले कंपनियां सेवा प्रदान करती हैं और कर्मचारियों को इन सर्विस के बदले पेमेंट बिना किसी रसीद के मिल जाता था। इस तरह टैक्स विभाग अनुमान नहीं लगा पाता था कि इन सेवाओं पर कितना जीएसटी लगेगा। इन्हीं सेवाओं को आधार बनाकर कंपनियां अपना टैक्स बचाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी ब्रेकअप तैयार करती हैं। अब अगर इन सेवाओं पर जीएसटी लगेगा तो कंपनियां कोशिश करेंगी कि जीएसटी को भी कर्मचारी के कॉस्ट टू कंपनी में जोड़ दें। इससे उनकी टैक्स देनदारी पर असर नहीं पड़ेगा।
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