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चांद बाग की पुलिया बनी बॉर्डर, दहशत के कारण एक-दूसरे के इलाके में जाने से डरते हैं लोग

Sat, 29 Feb 2020 09:39 PM IST
Vikas Kumar कमल कश्यप, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हिंसाग्रस्त इलाके में तैनात सुरक्षाकर्मी - फोटो : Social Media
चांद बाग की पुलिया। पुलिया के एक और मुस्लिम और दूसरी हिंदू आबादी रहती है। अब यह पुलिया अब एक ऐसा अदृश्य बॉर्डर बन चुकी है, जिसे पार करने की हिम्मत लोग नहीं जुटा पा रहे हैं। आलम यह है कि अगर हिंदू पक्ष को दयालपुर, शेरपुर, मूंगानगर की ओर जाना है, तो लोग खजूरी चौक से ज्ञानी मार्केट होते हुए अपने घरों तक पहुंच रहे हैं। 

उधर चांदबाग की ओर से मुस्लिम पक्ष को अगर दूसरी ओर जाना है, तो वे लोग भी दूसरे रास्तों को चुन रहे हैं। पुलिया पार अगर चार लोग इकट्ठे हैं, तो दूसरी ओर सुगबुगाहट शुरू हो जाती है। दिन में तो फिर भी लोग नजर आते हैं, लेकिन शाम ढलते ही एकदम सन्नाटा पसर जाता है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में लोग सुरक्षित तो महसूस करते हैं, लेकिन दोनों ही ओर के लोग गलियों में पहरा देने बैठ जाते हैं। यहां रहने वाले बड़े बुजुर्गों का कहना है कि युवाओं में गुस्सा है, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। अमन के लिए दोनों समुदाय को पहल करनी होगी।
 
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पत्थरों की सफाई करते सफाईकर्मी - फोटो : अमर उजाला
हटाए जा रहे हैं हिंसा के निशान
भजनपुरा चौक पर मजार के पास से लेकर शेरपुर चौक तक, करावल नगर रोड से लेकर शिव विहार, यमुना विहार, भजनपुरा पेट्रोल पंप, गोकुलपुरी, खजूरीखास, मीत नगर, मौजपुर, जाफराबाद रोड पर हिंसा के दौरान जलीं हुईं गाड़ियां, पत्थर, कांच की बोतलें आदि को हटाने का काम प्रशासन ने शुरू कर दिया है। सुबह से ही पूर्वी दिल्ली नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी, क्रेन, जेसीबी, पानी के ट्रक लेकर प्रभावित इलाकों में पहुंचने लगे हैं। भजनपुरा चौक से लेकर करावल नगर तक सड़कें पत्थरों से पटी हुई हैं। 

हिंसा की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा था। हिंसा की इन निशानियों को मौके से हटवाकर प्रशासन लोगों के मन से खौफ हटाने का प्रयास शुरू किया है। लेकिन जली इमारतों और उसके आसपास धुएं से काले हुए मकान अब भी हिंसा की दास्तां बयां कर रहे हैं। हालांकि नुकसान दोनों पक्षों का हुआ है और लोग अब भी खौफजदा हैं। चांदबाग में रहने वाले बाले मियां का कहना है कि चांदबाग से लेकर करावलनगर तक हिंदू पक्ष के लोगों से उनका अच्छा नाता रहा है। घर आना जाना भी था। तीज त्योहार भी मिलकर मनाते थे, लेकिन हिंसा के बाद से लोग एक दूसरे पक्ष के लोगों का चेहरा भी देखना मुनासिब नहीं समझ रहे। 

 
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हिसाग्रस्त इलाका - फोटो : अमर उजाला
गलियों में पहरा जारी, अफवाहों का दौर भी कम नहीं
अरे भागो, वो आ रहे हैं तैयार हो जाओ, अभी मैंने कुछ लोगों को देखा है। सामने भीड़ जमा हो रही है, पुलिस गायब है। ट्रक में भरकर कुछ आया है, ये ऐसी अफवाहें हैं, जो चांदबाग से लेकर करावलनगर तक खजूरी खास से लेकर गोकुलपुरी तक फैली हुई हैं। अफवाहों का आलम यह है कि लोग गलियों में रात को पहरा दे रहे हैं। शनिवार देर रात भी हिंसा  प्रभावित क्षेत्रों की गलियों में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। कई बार पुलिस और सुरक्षा बलों ने गलियों में घुसकर लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। साथ ही लोगों को घर के अंदर रहने की हिदायत की। करावल नगर रोड पर जो सुरक्षाबल तैनात थे। स्थानीय लोग उन्हें चाय पानी, खाना आदि भी देते देखे गए।

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हिंंसाग्रस्त इलाके में तैनात सुरक्षाकर्मी - फोटो : अमर उजाला
दो पक्षों के लोगों को गले में हाथ डालकर पुलिस ने घुमाया
चांद बाग के हिंसा प्रभावित इलाके में पुलिस अधिकारियों ने आपसी सौहार्द बनाने और लोगों के मन की कड़वाहट दूर करने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया। पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को गले में हाथ डालकर अपने साथ चांदबाग, चंदूनगर, मूंगानगर, खजूरी, नेहरू विहार आदि क्षेत्रों में घुमाया और लोगों को समझाया कि आपसी सौहार्द से ही शांति स्थापित की जा सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की कि अपने प्रतिष्ठान खोले, काम धंधे पर जाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें। मौके पर मौजूद लोग पुलिस से शिकायत करते भी नजर आए।
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हिंसाग्रस्त इलाका - फोटो : अमर उजाला
बाजार खुलने लगे, लेकिन पूरी तरह नहीं
भजनपुरा, चांदबाग, यमुना विहार, ब्रजपुरी, गोकुलपुरी, खजूरीखास, मूंगानगर, चंदूनगर, खजूरी खास, शेरपुर चौक, दयालपुर, करावलनगर, सादतपुर, शिवविहार, लालबाग, मौजपुर, जाफराबाद, कर्दमपुरी, मीतनगर इलाकों में बीते पांच दिन से बाजार पूरी तरह बंद थे। लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं और जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। बाजार खुल गए हैं। हालांकि दुकानदार भी डर के साये में जी रहे हैं। 
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
करोड़ों का सामान जल गया, मुआवजे से क्या होगा?
हिंसाग्रस्त चांदबाग और आसपास के प्रभावित इलाकों में ऐसे कई मकान व दुकान हैं, जिनका सामान तो जला ही आग के कारण घर की नींव भी कमजोर हो गई और लिंटर झुक गया है। ऐसे में पीड़ित लोगों के मन में इस बात का गुस्सा है कि सरकार मुआवजे के नाम पर जो जख्मों पर नमक छिड़क रही है वो नाकाफी है। इस मुआवजे में न तो घर ही बन पाएगा न दुकान ही शुरू की जा सकेगी। 
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
भाई जी अब दिल कैसे मिलेंगे
शमां परवीन चांद बाग में रहती हैं। परिवार पहले सीलमपुर में निवास करता था, शेरपुर के कई हिंदू घरों में उनके अच्छे संबंध थे। बच्चे उन्हें बुआ कहते थे। हिंसा ने रिश्तों को पूरी तरह खत्म कर दिया। बुआ भतीजे का रिश्ता भी खत्म हुआ और भाई-बहन का प्यार भी मिट गया। चंदू नगर की यादव गली में अथर, जफर, मुमताज के घरों में तोड़फोड़ हुई है। उपद्रवियों ने दुकानों को भी बर्बाद कर दिया। इन युवकों का यहां रहने वाले दूसरे पक्षों के साथ अच्छा याराना था। क्रिकेट खेलने से लेकर बिरयानी साथ खाते थे। लेकिन अब सब खत्म हो चुका है। मूंगानगर में श्याम चाय वाला दोनों पक्षों के लिए चाय पीने के साथ-साथ देश-दुनियां की चर्चा का अड्डा था। यहां राजनीति,खेल, देश दुनिया के हर मुद्दे पर चर्चा होती थीं। लेकिन श्याम की दुकान को उपद्रवियों ने जला दिया। श्याम इस घटना से टूट चुका है। वो कहता है कि भाई जी हालात तो सुधर जाएंगे, पर दिल कैसे मिलेंगे। खजूरी खास गली नंबर पांच में इलियास के मकान को जला दिया गया है। इलियास को दुख इस बात का है कि वो सबके सुख-दुख में खड़ा रहा, लेकिन जब उपद्रवी उनके मकान को फूंक रहे थे, तो दूसरे पक्ष के लोगों ने उसके मकान को बचाने की कोशिश नहीं की। 
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
पापा अब हम कैसे पढ़ेंगे
प्रभावित क्षेत्रों में कई स्कूल बंद पड़े हैं और कई जला दिए गए हैं। अपने स्कूलों को जला दिए जाने से बच्चे आहत हैं और परिवार से पूछ रहे हैं कि अब कैसे पढ़ेंगे? ब्रजपुरी का विक्टोरिया पब्लिक स्कूल हिंसा का शिकार हुआ है। शिवविहार का राजधानी स्कूल हिंसाग्रस्त है। चांद बाग के लखपत पब्लिक स्कूल, आरपी मॉडल पब्लिक स्कूल, जय पब्लिक स्कूल पर ताले जड़े हैं। आसपास के दर्जनों स्कूल भी बंद पड़े हैं। 
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