फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव की करारी हार के बाद क्या अब अपनी राजनीतिक जमीन बचा पाएंगे अरविंद केजरीवाल?

Mon, 27 May 2019 01:53 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
KEJRIWAL - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कभी देश की राजनीति को एक वैकल्पिक दिशा देने की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल के सामने अब दिल्ली के अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है। दिल्ली की सातों सीटों पर उसके उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

विज्ञापन


अगर विधानसभा चुनावों के लिहाज से बात करें तो सत्तर में से 65 सीटों पर भाजपा तो बाकी पांच पर कांग्रेस को बढ़त मिली है। यानी अगर यही वोटिंग विधानसभा में भी जारी रही तो आप के लिए बेहद मुश्किल परिस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

केजरीवाल की चुनौती इसलिए भी बेहद कड़ी होती मालूम पड़ रही है क्योंकि पार्टी के विशेष प्रभाव वाले इलाकों पूर्वी दिल्ली और उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में भी पार्टी को तीसरे नंबर पर रहकर संतोष करना पड़ा है जो मनीष सिसोदिया का गृह क्षेत्र है। स्वयं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र में भी आप का यही हाल रहा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस के साथ जुड़ने से आप को मुश्किल

लोकसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदाताओं ने कांग्रेस को सबसे ज्यादा मतदान किया है। सीलमपुर, ओखला और जामिया में कांग्रेस को खूब वोट मिले जबकि आम आदमी पार्टी उससे बुरी तरह पिछड़ चुकी है।

यह हाल सिर्फ मुस्लिम इलाकों का ही नहीं झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में भी हुआ है। यानी जिस वोट बैंक पर कभी कांग्रेस की पकड़ हुआ करती थी अब वह वापस कांग्रेस के खाते में जुड़ चुकी है और आम आदमी पार्टी की चिंता का सबसे बड़ा कारण यही है। 
 
'बड़े-छोटे के चक्कर में हार गए'
रविवार को आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के पंजाबी बाग़ इलाके में कार्यकर्ता सम्मेलन किया। इस सम्मेलन के बहाने अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव में मिली हार से निराश कार्यकर्ताओं को एक बार फिर ऊर्जा से भरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव वे सिर्फ इसलिए हार गये क्योंकि जनता बड़े चुनाव और छोटे चुनाव के चक्कर में फंस गई।

लोग बड़े चुनाव यानी देश के लिए तो नरेंद्र मोदी को एक बेहतर विकल्प मान रहे थे, जबकि छोटे चुनाव यानी दिल्ली विधानसभा के लिए वे अभी भी अरविन्द केजरीवाल के नाम पर भरोसा करते हैं। ‘दिल्ली के लिए केजरीवाल’ लिखे पोस्टरों से पटे मैदान में आप नेता ने कहा कि इस चुनाव में उनकी हार केवल इसलिए हुई क्योंकि मतदान उनके काम पर नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी के नाम पर हो रहा था।

अगर काम पर चुनाव होते तो उन्हें बड़ी जीत हासिल होती। उन्होंने कहा कि आप कार्यकर्ताओं को निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि बीते चार साल में उनकी सरकार ने बहुत काम किया है, लेकिन उनके ऊपर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है। 

तो क्या दिल्ली के लिए केजरीवाल ही जनता की पहली पसंद होंगे? इस सवाल के जवाब में आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि हमने सिर्फ 49 दिन के कामकाज के आधार पर जनता से वोट मांगे थे, जनता ने उन्हें 67 सीटें दे दी थी। अब उनके पास पांच साल का कामकाज है और वे इसके आधार पर जनता से वोट मांगेंगे। उन्हें पूरी उम्मीद है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के उनके काम को आधार मानकर जनता उन्हें भरपूर वोट देगी। आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें