सीबीएसई में दसवीं में सर्वाधिक अंक लाने वाले होनहारों का कहना है कि पढ़ाई को ‘पढ़ाई बोझ समझकर नहीं, शौक समझकर करें’। कामयाबी निश्चिंत ही आपके कदम चूमेगी। इसके साथ ही इनका सोशल मीडिया का इस्तेमाल तो करें लेकिन नियमित...
सिद्धांत पनगोरिया,नोएडा कामयाबी के लिए एक साल तक फोन तक का नहीं किया इस्तेमाल
सीबीएसई के 10वीं के नतीजों में लोट्स वैली स्कूल में पढ़ने वाले सिद्धांत पेनगोरिया पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी अव्वल है। एक साल तक फोन तक का इस्तेमाल नहीं किया। सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूर रहें। अगर कुछ समझ नहीं आता तो मम्मी की मदद लेते थे। हालांकि मनोरंजन के लिए स्पोर्ट्स, मूवी और गाने सुनते थे। यही वजह है कि कभी पढ़ाई का तनाव महसूस नही किया।
लक्ष्य: आगे कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं।
टिप्स: सोशल मीडिया से रहे दूर रिपोर्ट कार्ड
गणित 100
इंग्लिश 99
फ्रेंच 100
सोशल साइंस 100
साइंस 100
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2 of 10
शिवानी लाठ
- फोटो : अमर उजाला
शिवानी लाठ, नोएडा साल भर की मेहनत का मिला फल
शिवानी परीक्षा के दौरान मुश्किल गड़ी से गुजरी थी। परीक्षा के दौरान शिवानी की ताई की का निधन थी। इस वजह से परिवार के लोग पटना चले गए थे। अकेली रहकर शिवानी ने पढ़ाई की। वसुंधरा में रहने वाली शिवानी ने बताया कि मैंने 10 वीं में शुरू से ही पढ़ाई की थी। इसलिए कभी अंतिम समय में पढ़ाई को तनाव महसूस नहीं किया। शिवानी के पिता शिव कुमार लाठ सीए हैं और मां नीतू लाठ गृहणी हैं। मां से घर से ही बिजनेस करती हैं। शिवानी ने बताया कि 11 वीं में मैंने कॉमर्स के साथ गणित विषय लिया है। सीए करना चाहती हूं। उसके बाद सिविल सर्विस में जाना चाहूंगी। जब भी खाली समय मिलता है पेंटिंग करना पसंद है। इससे उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
लक्ष्य: सिविल सर्विस में जाने का टिप्स: पेपर देते समय साफ-साफ लिखें। महत्वपूर्ण वाक्यों को अंडर लाइन करें। इससे परीक्षक को कॉपी चैक करते समय आसानी होती है। परीक्षा की तैयारी करते समय खुद के नोट्स बनाएं। इससे बहुत मदद मिलती है। रिपोर्ट कार्ड
हिंदी 99
गणित 100
विज्ञान 100
अंग्रेजी 100
सामाजिक विज्ञान 100
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3 of 10
दिव्यांश वाधवा
- फोटो : अमर उजाला
एक नंबर कम आने का मलाल- दिव्यांश वाधवा, नोएडा
बाल भारती स्कूल के दिव्यांश वाधवा ने भी स्थान हासिल किया है। दिव्यांश वाधवा को पूरी उम्मीद थी कि वो सीबीएसई के रिजल्ट में 10 वीं में टॉप करेंगे। इसकी खुशी के साथ-साथ रिजल्ट में एक नंबर कम आने का दुख भी है। दिव्यांश का कहना है कि सोशल साइंस में हमेशा पूरे नंबर आते थे। इस विषय में 100 नंबर आने की उम्मीद थी। दिव्यांश ने बताया कि मैंने कभी ट्यूशन नहीं लिया है। कभी कोई दिक्कत होती थी तो टीचर हमेशा मदद करती थीं। प्रिंसिपल खुद कॉपी देखती थीं। दिव्यांश ने बताया कि 12 वीं के बाद में मैं न्यूक्लियर फिजिक्स में पढ़ाई करना चाहता हूं। इस विषय में मुझे बहुत रुचि है। मैं साइंस के नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में हिस्सा लेता रहता हूं। इसकी वजह से मुझे कई रिसर्च सेंटर में घूमने का मौका भी मिलता है।
लक्ष्य: इसरो और नासा में करना चाहते हैं काम टिप्स : कोचिंग के बजाय स्वअध्ययन करें। इसके साथ ही वर्ष भर नियमित पढ़ाई बहुत जरूरी है। रिपोर्ट कार्ड
हिंदी 100
गणित 100
विज्ञान 100
अंग्रेजी 100
सामाजिक विज्ञान 99
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अपूर्वा जैन
- फोटो : अमर उजाला
परीक्षा के समय सोशल मीडिया से बनाई दूरी- अपूर्वा जैन, गाजियाबाद
अपूर्वा अपनी सफलता के पीछे शिक्षक और परिजनों का बड़ा हाथ मानती हैं। कहती हैं इन लोगों ने हमें कभी तनाव महसूस नहीं होने दिया। अगर कोई विषय बोझिल लगता था तो उस पर स्कूल के साथ कोचिंग में समझ लेती थी। शुरुआत से मेरी कोशिश हर विषय को समझकर चलने की रही, जिसका मुझे परीक्षा में लाभ मिला। अपूर्वा का मानना है कि सोशल मीडिया गलत नही है, बशर्ते उसका सीमित इस्तेमाल हो। परीक्षा के दिनों में बहुत ज्यादा बोर हो जाने पर ही व्हाट्सएप का इस्तेमाल करती। लक्ष्य : कंप्यूटर इंजीनियर बनना। सक्सेस मंत्र : रूटीन से नियमित पढ़ाई करें। रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
संस्कृत 100
गणित 100
विज्ञान 100
सामाजिक विज्ञान 99
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ईश मदान
- फोटो : अमर उजाला
तनाव दूर करने में टेबल टेनिस बना मददगार- ईश मदान, गाजियाबाद
ईश मदान ने बताया कि वह रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। तनाव भगाने के लिए हर दिन एक घंटे टेबल टेनिस खेला, साथ ही खानपान पर भी ध्यान रखा। सिर्फ परीक्षा के दिनों में सोशल मीडिया से दूरी बनाई। विज्ञान और गणित थोड़ा कठिन लगा तो उसके लिए अलग से कोचिंग ली। ईश अपनी सफलता का श्रेय परिजनों और शिक्षकों को देते हैं। लक्ष्य : इंजीनियर बनना। सक्सेस मंत्र : परीक्षा के समय सोशल मीडिया से बनाई दूरी। रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
हिन्दी 100
सामाजिक विज्ञान 100
गणित 100
विज्ञान 99
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अंकुर मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
किसी तरह का कोई ट्यूशन नहीं लिया- अंकुर मिश्रा, गाजियाबाद
अंकुर का कहना है कि पढ़ाई के लिए कभी समय तय नहीं किया था, बल्कि लक्ष्य निर्धारित किया था। पढ़ाई शुरू करने से पहले यह तय कर लेता था कि आज कितना सिलेबस पूरा करना है। अब वह लक्ष्य चार घंटे में पूरा हो या फिर पांच से आठ घंटे में। जब तक एक-एक बिंदु समझ में नहीं आता था, तब तक उसी के पीछे लगा रहता था। किसी तरह का कोई ट्यूशन नहीं लिया। सिर्फ सेल्फ स्टडी के जरिये हर विषय को समझा। ईश पढ़ाई के अलावा क्रिकेट पसंद करते हैं और एमएस धोनी के फैन हैं। पढ़ाई के बाद तनाव दूर करने के लिए क्रिकेट खेलते हैं। लक्ष्य : इंजीनियर बनना। सक्सेस मंत्र : पढ़ाई का समय नहीं, हर दिन की पढ़ाई का लक्ष्य बनाएं। रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
हिन्दी 100
विज्ञान 100
सोशल साइंस 100
गणित 99
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योगेश गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
फ्री माइंड होकर की पढ़ाई- योगेश गुप्ता, जौनपुर
योगेश कुमार गुप्ता अपनी सफलता पर काफी खुश हैं। इसका श्रेय वह माता-पिता को देते हैं। योगेश ने बताया कि पढ़ाई को लेकर कभी बहुत दबाव में नहीं रहा। फ्री माइंड होकर पढ़ाई की। परीक्षा के दौरान भी सामान्य दिनों की तरह ही पढ़ाई की। स्कूल के अलावा घर पर रोज चार से पांच घंटे मेहनत करता था। इसी कारण परीक्षा के समय कभी दबाव महसूस नहीं हुआ। योगेश डॉ. एपीजे कलाम और स्वामी विवेकानंद को वह आदर्श मानते हैं। लक्ष्य: डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। टिप्स : पढ़ाई को कभी बोझ न समझे, हमेशा तानव मुक्त होकर पढ़ें रिपोर्ट कार्ड
अंग्रेजी 100
हिन्दी 100
विज्ञान 100
सोशल साइंस 99
गणित 100
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वत्सल वार्ष्णेय
फेसबुक से रहे बिल्कुल आउट: वत्सल वार्ष्णेय, मेरठ
सीबीएसई दसवीं की बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया टॉपर में शामिल मेरठ के वत्सल वार्ष्णेय ने 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। वत्सल दीवान पब्लिक स्कूल कैंट के छात्र हैं। उनका परिवार सोमदत्त विहार जागृति विहार में रहता है। पिता डॉ. अनुपम वार्ष्णेय मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजिस्ट हैं। मम्मी डॉ. तरंग गोयल मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। छोटा भाई वासु दीवान पब्लिक स्कूल में ही छठवीं कक्षा में पढ़ता है। वत्सल को मैथ सबसे ज्यादा प्रिय है। पढ़ाई के साथ बैडमिंटन खेलना पसंद है। वत्सल अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों व परिवार को देते हैं। वत्सल बीटेक करके इंजीनियर बनना चाहते हैं। माता-पिता चिकित्सक हैं, लेकिन वत्सल का सपना इंजीनियर बनना है। वत्सल केवल व्हाट्सएप प्रयोग करते हैं। सोशल मीडिया पर कोई एकाउंट नहीं है। व्हाट्सएप का प्रयोग भी केवल पढ़ाई और एजुकेशन ग्रुप तक सीमित है। वत्सल ने पांच में से चार विषयों में पूरे 100 अंक लिए हैं। केवल गणित में 99 अंक हैं, 01 नंबर कटा है। गणित में एक अंक कटने की वजह वत्सल सवाल में कंफ्यूजन को बताते हैं। बिना कोचिंग सफलता हासिल की है। वत्सल आगे की पढ़ाई पीसीएम स्ट्रीम लेकर कर रहे हैं।
लक्ष्य : बीटेक करके इंजीनियर बनना टिप्स : मन लगाकर पढ़ाई करें। पिछले साल के पेपर हल करें। साथ ही खुद के सैंपल पेपर बनाकर उन्हें लगातार हल करते रहें। पढ़ाई के दौरान तनाव न लें। स्कोर कार्ड
अंग्रेजी -100
फ्रैंच - 100
मैथ्स - 99
साइंस - 100
सोशल साइंस - 100
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मान्या
मोबाइल और सोशल मीडिया से बनाई दूरी, नहीं ली कोचिंग- मान्या, बठिंडा
सीबीएसई की ओर से दसवीं कक्षा के घोषित नतीजों में शहर की छात्रा मान्या ने 499.8 अंक हासिल कर अपने माता-पिता और अध्यापकों का नाम रोशन किया है। टॉप करने वाली छात्रा मान्या ने कहा कि उसे इतने अंकों की उम्मीद नहीं थी। लेकिन जैसे ही उसने अपना नतीजा देखा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मान्या ने बताया कि उसने एग्जाम और स्कूल के दिनों में मोबाइल और सोशल मीडिया से हमेशा ही दूरी बनाकर रखी है। बहुत जरूरी होने पर ही वह मोबाइल का इस्तेमाल करती है। बातचीत में मान्या ने बताया कि वह डाक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। उसने कहा कि अगर कोई भी स्कूली छात्र रूटीन में होमवर्क करेगा तो वो इस कामयाबी को आसानी से हासिल कर सकता है। उसने कहीं से किसी तरह की कोई कोचिंग भी नहीं ली है। मान्या ने इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और अध्यापकों को दिया। सेंट जेवियर्स स्कूल के फादर एड्रिन ने बताया कि मान्या के साइंस सब्जेक्ट में एक अंक कम आया है, अन्य सभी में उसके सौ प्रतिशत नंबर हैं। लक्ष्य: डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना
पांच घंटे, सोशल मीडिया आधे घंटे- तरू जैन, जयपुर
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अजमेर रीजन में जयपुर के जवाहर नगर निवासी तरू जैन ने 500 में से 499 अंक लेकर टॉप किया है। उन्होंने बताया कि वे चार से पांच घंटे रोजाना पढ़ाई को देती थीं और केवल आधा घंटा सोशल मीडिया को। वह रटने में विश्वास नहीं रखती। उनके पिता निजी बैंक में मुख्य प्रबंधक हैं और मां गृहिणी हैं। तरू इंटर के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करना चाहती हैं। लक्ष्य: सीए बनने का टिप्स : जो पढ़ें, समझकर पढ़े, रट्टा नहीं मारे