जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दशहरे पर एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया। जहां विजयदशमी पर देशभर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ व हाफिज सईद के चेहरों को रावण के पुतलों पर लगाकर जलाया गया, वहीं जेएनयू में एनएसयूआई ने पीएम मोदी, योग गुरु बाबा रामदेव, नत्थूराम गोडसे, योगी आदित्य नाथ, जेएनयू वीसी, साध्वी प्रज्ञा और आसाराम बापू के चेहरे पुतले पर लगाकर जलाए। इस घटना के बाद जेएनयू प्रशासन ने बृहस्पतिवार
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केंद्र सरकार की विफलता के खिलाफ प्रदर्शन
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- फोटो : अमर उजाला
यह पुतला जेएनयू कैंपस के पास स्थित सरस्वती ढाबे के नजदीक जलाया गया। छात्रों का कहना है कि इन्हें बुराइयों के प्रतीक के रूप में मानकर ऐसा किया गया। रावण की जगह पीएम मोदी का पुतला जलाए जाने के बाद से इस मामले पर सियासी घमासान शुरु हो गया है। एनएसयूआई के छात्रों द्वारा किए गए इस कृत्य के बाद बीजेपी सोनिया गांधी से मांफी की मांग कर रही है।
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- फोटो : अमर उजाला
एनएसयूआई की जेएनयू यूनिट से जुड़े व छात्रसंघ चुनावों में उम्मीदवार रहे सन्नी धीमान ने बताया कि ऐसा करके हमने अपना अंसतोष प्रकट किया है। वहीं बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने केस दर्ज करने की मांग भी की है। इस बीच कांग्रेस की ओर से इस घटना को लेकर सफाई भी दी जा रही है।
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- फोटो : फेसबुक पेज से
प्रधानमंत्री के खिलाफ हमने किसी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया।यह केंद्र सरकार की विफलता के खिलाफ प्रदर्शन था।
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उन्होंने कहा कि हमने विजयदशमी इसलिए चुना, क्योंकि बाबा साहेब अंबेडकर ने इसी दिन बौद्ध धर्म को अपनाया था।
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हम बाबा रामदेव का सम्मान करते हैं, लेकिन अब वे बिजनेसमैन बन गए हैं।
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सरकार के वादे अभी तक कागजों पर हैं और इन्हें भाषणों में ही दोहराया जा रहा है।
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छात्र आवाज उठाने का प्रयास करते हैं, तो प्रशासन की ओर से उन पर हमले कराए जाते हैं।