रिपोर्ट के मुताबिक, एक अभिभावक ने बताया कि वह प्रत्येक तिमाही 3100 रुपये जमा करते हैं। इसके अलावा 12,000 रुपये किताब, ड्रेस का खर्च अलग होता है। स्कूल पिकनिक समेत अन्य गतिविधियों के लिए अलग से चार्ज करते हैं। खर्च के हिसाब से सरकार जो पैसा देती है वह नाकाफी है।
एनसीआरपीसीआर ने रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि इस ड्राप आउट पर सरकार को फिर काम करना होगा। शिक्षकों का ओरिएंटेशन प्रोग्राम होना चाहिए। हिंदी और अंग्रेजी में पढ़ाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
राज्य सरकारों व निजी स्कूलों को स्कूल छोड़ने वाले बच्चों व अभिभावकों से फालोअप लेना चाहिए। साथ ही एनसीईआरटी की सस्ती दरों वाली किताबों को ही पढ़ाने के लिए स्कूलों को कहा जाए, ताकि किताबों का खर्च कम किया जा सके।