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किराड़ी हादसाः भयावह था मंजर, चारों ओर थी चीख-पुकार, गेट तपकर हो गए थे लाल

Tue, 24 Dec 2019 01:59 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शुजात आलम
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किराड़ी अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
रात के सवा बारह बजे थे। अचानक इंदिरा एन्क्लेव के मकान नंबर-204 के ग्राउंड फ्लोर पर बने कपड़े के गोदाम से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते लपटें निकली और आग ने भयावह रूप धारण कर दिया। पहली मंजिल पर मौजूद उदयकांत चौधरी और उनके परिजनों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। ठिठुराने वाली ठंड में शोर-शराबे से पड़ोसियों की आंख खुली तो उनके होश उड़ गए। 
 
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किराड़ी अग्निकांड - फोटो : Amar Ujala
मकान की दूसरी मंजिल पर अमरनाथ की पत्नी पूजा बच्चों के साथ खड़ी थी और जान बचाने की गुहार लगा रही थी। पुलिस व दमकल विभाग को सूचना देने के बाद पड़ोसी बिल्डिंग में फंसे लोगों को बचाने के लिए भागे। हादसे वाली इमारत के ठीक बराबर वाले मकान की पहली मंजिल पर सीढ़ी लगाई गई। किसी तरह वहां से दूसरी मंजिल की छत पर फंसी पूजा, उनकी बेटी आराध्या और भतीजी सौम्या को उतारा गया।
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किराड़ी अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
देखते ही देखते लोगों की भारी भीड़ वहां जमा हो गई। इस बीच, कुछ पुलिसकर्मी बाइक से वहां पहुंच गए। इसके बाद दमकल की चार गाड़ियां पहुंची। इधर आग बढ़ने लगी। उसकी लपटें ऊपरी मंजिलों तक जाने लगीं। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर बने गोदाम के गेट का ताला बाहर से लगा हुआ था। वहीं ऊपर आने-जाने के रास्ते के जीने वाले गेट पर अंदर से ताला लगा था। आग से दोनों दरवाजे लाल हो चुके थे। दमकलकर्मी अभी आग बुझा ही रहे थे कि दूसरी मंजिल पर एलपीजी सिलिंडर भी फट गया। इससे वहां अफरा-तफरी और बढ़ गई। 

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किराड़ी अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
दमकल विभाग के एडीओ एके शर्मा ने बताया कि ऊपर कई लोगों के फंसे होने की सूचना थी। किसी तरह आग पर थोड़ा काबू पाकर पहले गोदाम और जीने के दरवाजे को तोड़ा गया। खुद एके शर्मा एक दमकलकर्मी के साथ बीए (अग्निशमन) सूट व ऑक्सीजन मास्क पहनकर अंदर दाखिल हुए। पहली मंजिल के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। शर्मा ने दमकलकर्मी के साथ मिलकर उसे तोड़ा।
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किराड़ी अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
अंदर उदयकांत, उनकी पत्नी मुस्कान और तीनों बच्चे पड़े हुए थे। दमकलकर्मियों ने पहले बारी-बारी से सभी को सीपीआर दिया। इसके बाद एक-एक कर सभी को नीचे उतारा गया। बाद में एंबुलेंस व पीसीआर की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। दूसरी मंजिल पर दो अलग-अलग कमरों से रामचंदर, सुधीरिया देवी व संजू झा के शव बरामद हुए। अंदर सिलिंडर फटने की वजह से दूसरी मंजिल को काफी क्षति पहुंची थी। तलाशी के दौरान पुलिस को दूसरी मंजिल के शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद मिला। बाद में वहां से बालमुखी का शव बरामद हुआ। दमकलकर्मियों ने सभी नौ शवों को वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचवाया। दमकलकर्मियों का कहना था कि बिल्डिंग में आग लगने के दौरान बचने का कोई रास्ता नहीं था। ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई। शुरुआती जांच से लग रहा है कि ग्राउंड फ्लोर पर बने गोदाम में शार्ट सर्किट की वजह से आग लगी और ऊपरी मंजिल पर पहुंची।
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