फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रेन डेड व्यक्ति ने दिया तीन लोगों को जीवन, शहर में पहली बार बना ग्रीन कॉरिडोर

Mon, 08 Aug 2016 10:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
1 of 6
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बची तीन जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
74 वर्षीय ब्रेन डेड पवन कुमार के परिवार वालों की सूझबूझ के चलते तीन परिवारों को नई जिंदगी मिल पाई है। अस्पताल की तरफ से ब्रेन डेड की सूचना मिलते ही परिजनों ने मरीज की दोनों किडनी और लिवर डोनेट कर दिए। इसके चलते तीन मरीज दोबारा से पहले जैसे अपनी जिंदगी जी सकेंगे। गाजियाबाद के कविनगर में रहने वाले पवन कुमार ब्रेन हेमरेज होने पर गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती थे। रविवार की रात 10.42 बजे नोएडा केजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 
विज्ञापन

2 of 6
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बची तीन जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
जहां पर ब्रेन डेड होने पर परिजनों ने ऑर्गन डोनेट करने की सहमति दी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधक ने पूरी प्रक्रिया शुरू की। वहीं पुलिस की मदद से नोएडा में पहली बार ग्रीन कॉरिडोर बनवाया गया। जेपी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट अमित देवरा ने बताया कि परिवार वालों के ऑर्गन डोनेट करने की सहमति बनने पर नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ऑर्गनाइजेशन) से संपर्क किया गया। वहां से सहमति मिलने पर सोमवार की सुबह 10 से 12 बजे के बीच में मरीज के शरीर से दो किडनी और लिवर निकाले गए। 
विज्ञापन

3 of 6
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बची तीन जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
नोटो से अनुमति मिलने पर एक किडनी फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया। पवन कुमार का ब्लड बी-पॉजिटिव था। इसको देखते हुए रात के समय ही जेपी अस्पताल ने किडनी के लिए 63 वर्षीय मरीज से संपर्क कर लिया था। वो मरीज पिछले चार वर्षों से डायलेसिस पर चल रहे थे। उनकी पत्नी को मधुमेह है, इस वजह से वो अपनी किडनी नहीं दे पा रही थी। वहीं लिवर 69 वर्षीय बुजुर्ग को डोनेट किया गया। जेपी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर अमित देवरा और डॉ. अभिदीप चौधरी की टीम की देखरेख में पूरी प्रक्रिया हुई। 

4 of 6
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बची तीन जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
17 मिनट में अस्पताल पहुंची एंबुलेंस 
फोर्टिस अस्पताल के जोनल प्रमुख गगन सेहगल ने बताया कि हम लोगों को नोटो की तरफ से रविवार रात 2 बजे किडनी देने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद ही जेपी अस्पताल से संपर्क स्थापित किया गया। रात को ही पूरी प्रक्रिया पर बात हो गई थी। फोर्टिस अस्पताल की लिस्ट में कई किडनी ट्रांसप्लाट के केस हैं। इसलिए रात को ही दिल्ली में रहने वाली 39 वर्षीय महिला से संपर्क स्थापित किया गया और उन्हें अस्पताल बुलाया गया। सुबह फोर्टिस अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की टीम जेपी अस्पताल में पहुंची। 
विज्ञापन

5 of 6
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बची तीन जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
जल्द से जल्द किडनी अस्पताल को मिल जाए, इसके लिए पुलिस की मदद से कॉरिडोर बनाया गया। दोपहर 12.07 बजे जेपी अस्पताल से एंबुलेंस चली। वहां से फोर्टिस अस्पताल में 17 मिनट के अंदर एंबुलेंस आ गई। उसके बाद किडनी के केएफटी, एलएफटी, अल्ट्रासाउंड और यूरिन एनालेसिस टेस्ट किया गया। उसके बाद ट्रांसप्लांट शुरू किया गया। डॉक्टर ने बताया कि किडनी को 10 किलो के आइस पैक बॉक्स के अंदर किडनी को 0 से चार डिग्री तापमान के बीच रखा गया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बची तीन जिंदगी - फोटो : अमर उजाला
कॉरिडोर का मतलब
डॉक्टरों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट केस में ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाता है। हार्ट को शरीर से निकालने के बाद चार घंटे तक और किडनी को 24 घंटे में ट्रांसप्लांट कर देना चाहिए। वैसे जितनी जल्दी ट्रांसप्लांट किया जाए, उतना अच्छा होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें