आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा भारत में आतंकी हमले के इनपुट्स अभी भी बने हुए हैं। सीएए-एनआरसी, धारा-370 और राममंदिर को लेकर आईएस बहुत ज्यादा बौखलाया हुआ है। आईएस की पूरे भारत में करीब 100 जगहों पर एक साथ आतंकी धमाका कराने की साजिश थी। मार्च महीने में जामिया नगर, दिल्ली से आईएस के आतंकी जहांजेब व उसकी पत्नी हिना ने आईएस की इस साजिश का खुलासा किया था और अब अबू यूसुफ ने भी इस ओर इशारा किया है।
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isis terrorist Abu Yusuf
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अबू यूसुफ के दो मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजेगी, ताकि ये पता लग सके कि ये किस-किस से चैटिंग व टेलीग्राम कॉलिंग करता था। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया विभाग के पास आईएस द्वारा भारत में आतंकी हमले करवाने के अभी इनपुट्स हैं। अबू यूसुफ से पूछताछ में इसकी पुष्टि हुई है। अबू युसूफ ने बताया कि भारत में आईएस लोन वुल्फ अटैक की साजिश रच रहा है।
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Abu yusuf
- फोटो : ANI
स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर निवासी आईएस के आतंकी जहांजेब के मोबाइल फोन की जब फोरेंसिक रिपोर्ट आई थी तो पता लगा कि वह थ्रीमा ग्रुप पर चैटिंग करता था। जहांजेब ग्रुप पर तिहाड़ जेल में बंद आईएस के आतंकी अब्दुल्ला बासित और अफगानिस्तान में बैठा आईएस के भारत चीफ से चैटिंग करता था। भारत चीफ व अब्दुल्ला बासित ने चैटिंग पर जहांजेब को लिखा था कि पूरे भारत में एक ही समय पर 100 से ज्यादा बम धमाके करने हैं। कोई भी बम धमाका खाली न जाए।
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गिरफ्तार आतंकी अबु युसूफ
- फोटो : अमर उजाला
भारत चीफ ने आदेश दिया था कि भारत में बम धमाकों के लिए सीएए के विरोध में उतरे एक समुदाय के युवकों का इस्तेमाल करो। इस मोबाइल चैटिंग में भारत में तबाही फैलाने की सारी बातें लिखी थीं। आईएस आकाओं ने अबू यूसुफ को भी जेहाद के नाम पर युवाओं को आईएस में भर्ती करने के आदेश दिए थे। अबू यूसुफ ये काम बखूबी कर रहा था। अबू यूसुफ ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि आईएस भारत में हर हाल में बम धमकाने करवाना चहाता है।
आईएस की साजिश ये भी है कि वह आतंकी हमले के लिए भारत के युवा व यहां के बदमाश-गैंगस्टर का इस्तेमाल करे। ऐसे में दिल्ली पुलिस जहांजेब, उसकी पत्नी व अब्दुल्ला बासित से फिर से पूछताछ करेगी। इसके लिए दिल्ली पुलिस अबू यूसुफ का रिमांड बढ़वाएगी। हालांकि जहांजेब व उसकी पत्नी की गिरफ्तारी होने के बाद आगे की जांच दिल्ली पुलिस से लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई थी।