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अयोध्या जाने का ऐलान करने पर ही कैद कर लिए जाते थे कारसेवक, जनानखाना में छिपते-छिपाते पूरा किया सफर

Sun, 10 Nov 2019 11:30 AM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाईल फोटो - फोटो : Social Media
अयोध्या की जमीन पर राम मंदिर बनाने की मांग और उसे लेकर लड़ी गई लड़ाई सदियों पुरानी है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही शनिवार को अपना फैसला सुनाकर इस विवाद पर पूर्णविराम लगा दिया हो, लेकिन इससे जुड़े कई पुराने किस्से हैं जो इस सफर के एक-एक कदम को बयां करते हैं। आगे पढ़ें 90 के दशक का ऐसा ही एक किस्सा जिसमें हम बता रहे हैं कि उन दिनों कारसेवकों को अयोध्या तक पहुंचने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता था। 
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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
कई कारसेवकों को दिल्ली में ही कैद कर लिया गया
दिसंबर 1992 में दिल्ली के चांदनी चौक से भी कई कारसेवकों ने अयोध्या जाने की घोषणा की थी। जैसे ही प्रशासन को पता चला, कोतवाली पुलिस थाने ने उन्हें हिरासत में लेकर यमुना पार स्थित एक स्कूल में कैद कर दिया। इसी तरह 4 दिसंबर से 9 दिसंबर तक कई लोगों को दिल्ली के अलग-अलग हिस्से में हिरासत में रखा गया। स्कूल में चार दिनों तक कैद रहने वाले प्रवीण शंकर कपूर बताते हैं कि चांदनी चौक के युवकों ने ऐलान किया था कि कारसेवा के लिए अयोध्या जाएंगे। इतना पता चलते ही सभी को हिरासत में ले लिया गया।
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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
आंखों के आसपास लगाना पड़ा नमक
प्रवणी शंकर कपूर बताते है कि दिल्ली के कई लोगों में आज भी कारसेवा के लिए अयोध्या नहीं जाने की कसक रह गई। मंदिर मार्ग स्थित काली बाड़ी मंदिर में बड़ी संख्या में कारसेवक उस दौरान पहुंचे हुए थे। अचानक से पुलिस ने आंसू के गोले दाग दिए। इससे कार सेवक काफी परेशान हो गए। इसके बाद इलाके के लोगों ने मंदिर अपने-अपने घरों से नमक लेकर कार सेवकों के लिए पहुंचे। आंसू के गोले से परेशान लोगों ने आंखों के समीप नमक लगाकर राहत की सांस ली।
 

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कारसेवक - फोटो : Social Media
जनानाखाना में छुप कर अयोध्या पहुंचे कारसेवक 
दिल्ली से अयोध्या के लिए कूच करने वाले कारसेवक राष्ट्र प्रकाश बताते हैं कि कारसेवकों को लोग भगवान के दूत के रूप में मानते थे। जब उत्तर प्रदेश पुलिस गांव के घरों में छापा मारती थी तो गांव की औरतें अपना जनाना खाना खाली कर देती थीं, ताकि कारसेवक वहां छुप सकें और पुलिस से महफूज रह कर अयोध्या पहुंच सकें। कारसेवक जहां भी जाते थे लोगों के मन में यह रहता था कि भगवान राम के साथी आ रहे हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
बकौल राष्ट्र प्रकाश कारसेवकों को कष्ट तो जरूर हुआ, लेकिन एक अच्छा अनुभव मिला। अयोध्या के रास्ते में कई कारसेवक को पुलिस फायरिंग में गोलियां लग जाती थी, उन्हें अन्य कारसेवक सड़क पर रख देते थे, ताकि पुलिस उन्हें कम से कम अस्पताल तक पहुंचा कर प्राथमिक उपचार दिला सके। अक्तूबर 1990 में दिल्ली से रवाना हुए कारसेवक लखनऊ स्टेशन पर जैसे ही उतरने लगे उन्हें दूर से ही नहीं उतरने का इशारा किया गया। फिर सुनियोजित तरीके से ट्रेन की चेन पुलिंग कर गोंडा के करीब उतारा गया। 
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मंदिर के लिए तैयार पत्थरों को देखते लोग - फोटो : Social Media
इसके पहले इटावा स्टेशन पर गहन चेकिंग हुई। कई कारसेवकों को ईटावा में ही उतार दिया गया। जंगल-झाड़ी, दलदल, रेलवे ट्रैक करते हुए सरयु के आगे तक कारसेवक पहुंच गए थे। जहां प्रशासन की तरफ से कारसेवकों पर लगातार फायरिंग की जा रही थी, लेकिन राम के भक्त सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ते रहे। यह भी प्रयास रहता था कि एक कार सेवक दूसरे कारसेवक की पहचान नहीं बताए। पिछले 30 सालों तक करसेवकों को कचोट होता रहा कि अबतक मंदिर नहीं बन पाया।
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सरयु नदी - फोटो : Social Media
...जब बंदूक की गोली कारसेवक के दस इंच दूर से निकली
इन दिनों पूरे देश में इस मामले को लेकर उबाल था। मंदिर बनाने की दृढ़ इच्छा के साथ अन्य राज्यों की तरह ही दिल्ली से भी अयोध्या के लिए सौ से अधिक लोग निकल पड़े थे। जगह-जगह लोगों को हिरासत में लिया जा रहा था। सैकड़ों में से महज पंद्रह लोग ही अयोध्या पहुंच पाए थे। वो जैसे ही सरयु पुल के पास पहुंचे, प्रशासन की तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। 
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कारसेवक धर्मवीर शर्मा - फोटो : अमर उजाला
1990 के दिसंबर महीने में दिल्ली से अयोध्या के लिए कूच करने वाले कारसेवक धर्मवीर शर्मा बताते हैं कि सरयु पुल के पास फायरिंग के दौरान बंदूक की गोली एक कारसेवक के सीने के बिलकुल करीब से होकर गुजर गई, लेकिन मंदिर बनाने की प्रेरण ने किसी के कदम को रुकने नहीं दिया। बकौल धर्मवीर शर्मा यात्रा कठिन थी, लेकिन जनमानस का सहयोग था। जहां भी ठिकाना बनाते थे वहां गांव के लोगों का सहयोग रहता था। एक गांव से दूसरे गांव पहुंचाने की भी जिम्मेदारी उनकी थी। उन्होंने बताया कि जगह-जगह फायरिंग व पुलिस प्रशासन से बचते हुए सरयू तक पहुंचने में कामयाब हो पाए थे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से अब राजनीतिक रोटियां लोग सेकना बंद कर देंगे। अदालत के फैसले ने मुस्लिम पक्ष को भी संतुष्ट किया है। संतुलित फैसला आया है।
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