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बकौल राष्ट्र प्रकाश कारसेवकों को कष्ट तो जरूर हुआ, लेकिन एक अच्छा अनुभव मिला। अयोध्या के रास्ते में कई कारसेवक को पुलिस फायरिंग में गोलियां लग जाती थी, उन्हें अन्य कारसेवक सड़क पर रख देते थे, ताकि पुलिस उन्हें कम से कम अस्पताल तक पहुंचा कर प्राथमिक उपचार दिला सके। अक्तूबर 1990 में दिल्ली से रवाना हुए कारसेवक लखनऊ स्टेशन पर जैसे ही उतरने लगे उन्हें दूर से ही नहीं उतरने का इशारा किया गया। फिर सुनियोजित तरीके से ट्रेन की चेन पुलिंग कर गोंडा के करीब उतारा गया।