अटाली हिंसा को लेकर बुधवार को दिन भर नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। कांग्रेस, सीपीआई, जेडीयू और आम आदमी पार्टी के नेता और पदाधिकारी राहत शिविर पहुंचे। कुछ ने पीड़ितों को समझाया और कुछ ने उलझाने की कोशिश की। अंत में पीड़ितों ने अपने मन की बात सुनाई और सरकारी प्रतिनिधियों के समझाने के बाद घर वापस जाने का निर्णय लिया। किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि की दाल नहीं गलने दी।
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अटाली हिंसा: नेताओं को नकारा खुद ही लौट आए अपने घर
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कांग्रेस, जेडीयू, सीपीआई के सांसदों ने इस मामले को लेकर सरकार पर जमकर तीर चलाए। वहीं, दूसरी ओर प्यार-मोहब्बत का संदेश लेकर सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश सर्वधर्म संसद के प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे। उन्होंने दोनों समुदायों के मौजिज लोगों से सुलह का अनुरोध किया। सुबह करीब 10:00 बजे जेडीयू से राज्यसभा सांसद अनवर अली, सीपीआई नेता और राज्यसभा सांसद डी. राजा और कांग्रेस सांसद शादीलाल बत्रा संप्रदाय विशेष के लोगों से मिलने बल्लभगढ़ पहुंचे।
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उनके साथ स्वराज संवाद से रमजान चौधरी भी थे। दोपहर करीब एक बजे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर दलबल के साथ पीड़ितों का हालचाल पूछने के नाम पर शिविर में आ गए।
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कुछ देर बाद आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष और संजय सिंह भी पहुंचे। अपनी हाजिरी लगाई। सबने दुख बांटने के बहाने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश की।
अटाली हिंसा: नेताओं को नकारा खुद ही लौट आए अपने घर
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दूसरी तरफ इनकी राजनीति पर लोगों की सूझबूझ भारी पड़ी। लोगों ने यह समझा कि बाहरी लोग विवाद सुलझाने की जगह उलझाएंगे। इसलिए लोगों ने इन नेताओं के बयानों की परवाह नहीं की।