अटाली गांव में हुई हिंसा को रोकने में असफल साबित हुई पुलिस अब आरोपियों को गिरफ्तार करने में भी लापरवाही बरत रही है। ‘ऊपर’ से आदेश मिलने के इंतजार में कार्रवाई रुकी हुई है। हिंसा के बारह दिन बाद भी पुलिस ने एक भी आरोपी को नहीं पकड़ा है।
विज्ञापन
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
2 of 8
हमले के आरोपी अभी भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं, दिन रात पुलिस की मौजूदगी के बावजूद पीड़ित परिवारों में अनजाना खौफ छाया हुआ है। पुलिस आयुक्त सुभाष यादव का कहना है कि आरोपियों को गिरफ्तार कर ही लिया जाएगा, देर होने की बात कह पुलिस पर बेवजह दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
3 of 8
अटाली गांव हिंसा के आरोपियों पर पुलिस शिकंजा नहीं कस रही है क्योंकि उसे ‘ऊपर’ से ऐसा करने से रोका गया है। विभाग के एक आला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि काफी दबाव होने की वजह से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
4 of 8
पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों की ओर से गिरफ्तारी न किए जाने के मौखिक निर्देश मिले हैं। हालांकि वह इसके पीछे प्रशासन की मंशा भी समझाते हैं, हिंसा में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुए सिर्फ दो दिन ही हुए हैं।
विज्ञापन
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
5 of 8
अभी गांव में जीवन सामान्य नहीं हो सका है। ऐसे में गिरफ्तारी शुरू की जाएगी तो एक बार फिर ग्रामीणों में असंतोष भड़क सकता है। वह स्वीकार करते हैं कि हिंसा के आरोपी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं।
विज्ञापन
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
6 of 8
इससे पीड़ित परिवारों में खौफ छाया है। मुजेसर क्षेत्र के एसीपी अजीत सिंह ने कहा कि गांव की सुरक्षा दिन-रात मुस्तैदी से की जा रही है। वह खुद चौबीस घंटे गांव पर नजर बनाए हुए हैं। गिरफ्तारी के प्रश्न पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
7 of 8
जिला पुलिस अटाली हिंसा पर पर्दा डालने में जुटी है। पहले एक ही एफआईआर दर्ज कर मामले की गंभीरता को कम करने की कोशिश की गई, दबाव पड़ा तो पीड़ितों से अलग-अलग तहरीर लेकर एफआईआर दर्ज कराई गईं।
अटाली हिंसा: गांव में खुलेआम घूम रहे हैं आरोपी, छाया है खौफ
8 of 8
इन रिपोर्ट में पीड़ितों ने नामजद आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराईं। पुलिस ने नामजद केस तो दर्ज किया, लेकिन आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं होने दिया। पुलिस आयुक्त सुभाष यादव ने तो मीडिया तक को थाना परिसर में घुसने से रुकवा दिया था। छांयसा थाने में हिंसा को लेकर कुल कितने केस दर्ज हुए और कितने लोग नामजद किए गए, पुलिस ने इसे भी छिपा लिया है। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने के पीछे पुलिस पर राजनीतिक पार्टियों का दबाव है। हालांकि पुलिस आयुक्त कहते हैं कि जब एफआईआर दर्ज हुई है तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी, पुलिस अपना काम कर रही है।