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PHOTOS: थाने में रहने को मजबूर बहू-बेटियां, छावनी बना गांव

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धार्मिक उन्माद की शिकार ज्यादातर महिलाएं व बच्चे ही होते हैं। अटाली गांव में सोमवार को जो कुछ भी हुआ वह इन्हें हिला देने के लिए काफी था। सिटी थाना परिसर में बनाए गए राहत शिविर में भूखे-प्यासे लोग उस दिन को याद करते हुए कांप उठते हैं। सियासत ने ऐसी चाल चली कि दो समुदायों को आमने-सामने कर दिया। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो/फरीबाद)
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धार्मिक स्थल निर्माण को लेकर अटाली गांव में जारी तनाव को शांत कराने में लोकल पुलिस की नाकामयाबी के बाद राज्य सरकार के अनुरोध पर गांव में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने मोर्चा संभाल लिया है।
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गांव में आरएएफ के 400 जवानों की तैनाती की गई है, जिनमें दो सौ महिला जवान शामिल हैं। गांव पहुंचते ही जवानों ने फ्लैग मार्च किया। चार दिन पहले अटाली गांव में धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर दो समुदाय में भारी संघर्ष हुआ।

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इस संघर्ष में जमकर पथराव और दर्जन भर घरों में आगजनी की गई। तनाव को बढ़ाता देख पुलिस ने गांव में धारा-144 लगाई हुई है। मामले को शांत करने में लोकल पुलिस नाकाम रही। अल्पसंख्यक समुदाय पुलिस पर दूसरे समुदाय के साथ मिलीभगत का आरोप लगा रहा है।
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बुधवार को अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर प्रश्न खड़े किए। पुलिस की नाकामी और लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए बृहस्पतिवार को आरएएफ ने मोर्चा संभाल लिया।
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गांव के चप्पे-चप्पे पर अब पुलिस व आरएएफ के जवान तैनात किए। लगभग एक हजार सुरक्षाकर्मियों की वजह से पूरा गांव छावनी बना हुआ है।
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पुलिस ने अब पूरी तरह गांव में ही डेरा डाल दिया है। सरकारी स्कूल में अस्थायी पुलिस लाइन कम कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम से पुलिस के बड़े अधिकारी लगातार अपडेट लेंगे।

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साथ ही पुलिस के जवानों को अब गुड़गांव, रेवाड़ी या फरीदाबाद स्थित अपने क्वार्टरों पर नहीं जाना पड़ेगा। कंट्रोल रूम पर जवानों के सभी सुविधाएं मौजूद रहेंगी।

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सिटी थाने में अटाली आगजनी पीड़ितों के लिए बने राहत शिविर में बृहस्पतिवार दोपहर 12:30 बजे विधायक टेकंचद शर्मा समर्थकों के साथ पहुंचे। उन्होंने गांव वापस लौटने का अनुरोध किया, जिसे पीड़ितों ने ठुकरा दिया।

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कहा- चार दिन हो गए, आरोपी गिरफ्तार नहीं हैं, कैसे गांव चलें। विधायक ने कहा, इस मामले में गांव के लोग राय दें तो बेहतर होगा। विधायक का तर्क था कि गांव में जाने से माहौल धीरे-धीरे शांत हो जाएगा।

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वरना मामला जितना ज्यादा खिंचेगा उतना द्वेष और तनाव बढ़ेगा। इतना सुनते ही पीड़ित नाराज हो गए। विधायक को खरी-खोटी सुनाने लगे।
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आसिया ने कहा कि विधायक जी आपने मंगलवार को गांव जाने के लिए कहा था। बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में एक बुजुर्ग की पिटाई की गई।
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