देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री में से एक नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तलवार दंपति को रिहा कर दिया। आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार और मां डॉ. नूपुर तलवार बेटी व नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में उम्रकैद सजा काट रहे हैं। उन्होंने गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। आइए जानते हैं इस केस में कब क्या हुआ और क्या है 9 साल से अनसुलझी ये मर्डर मिस्ट्री-
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आरुषि-हेमराज
- फोटो : फाइल फोटो
क्या है पूरा मामला- आरुषि व हेमराज की हत्या 15 मई 2008 की रात सेक्टर-25 जलवायु विहार स्थित घर में हुई थी। 16 मई की सुबह आरुषि का खून से लथपथ शव उसके कमरे में बिस्तर पर पड़ा मिला था। उस दिन नोएडा पुलिस ने घर की छत पर तलाशी नहीं ली थी। लिहाजा, पुलिस ने नौकर हेमराज को लापता मानते हुए उसे ही हत्या का आरोपी मान लिया था।
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केस में 17 मई की सुबह तब नया मोड़ आ गया, जब हेमराज का भी खून से लथपथ शव तलवार दंपति के फ्लैट की छत से बरामद हो गया। ये शव नोएडा में तैनात रह चुके पूर्व डीएसपी केके गौतम ने बरामद किया था। वह हत्याकांड की सूचना मिलने पर अपने एक दोस्त के साथ तलवार दंपत्ति के फ्लैट पर पहुंचे थे।
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हत्याकांड में नोएडा पुलिस ने 23 मई को डॉ. राजेश तलवार को बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। 1 जून को इस केस की जांच सीबीआई को स्थानांतरित हो गई। सीबीआई की जांच के आधार पर गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तब से तलवार दंपति जेल में बंद हैं।
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ये 5 लोग माने गए सस्पेक्ट?
शुरुआत में तो इस केस में 3 नौकरों और तलवार दंपति समेत कुल पांच लोगों को सस्पेक्ट माना गया। तीनों नौकर सबूत न मिलने की वजह रिहा कर दिए।
1) राजकुमार: यह नेपाल का रहने वाला है। राजकुमार घर का काम देखता था। तलवार दंपती के एक दोस्त के घर का काम भी संभालता था।
2) विजय मंडल: विजय तलवार दंपती के पड़ोसियों के घर में काम करता था।
3) कृष्णा थंडाराज: राजेश तलवार के नोएडा के क्लिनिक में काम करता था। वह हेमराज का दोस्त था। जलवायु विहार के आसपास ही रहता था।
4) खुद तलवार दंपती डॉ. राजेश और नूपुर तलवार। बाद में इन्हें ही दोषी माना गया।
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कौन हैं तलवार दंपती और इस केस की कैसे-कैसे हुई जांच-
तलवार दंपति दिल्ली समेत एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे हैं। एक ओर जहां डॉ. राजेश तलवार पंजाबी परिवार से हैं तो नूपुर तलवार एक महाराष्ट्रियन परिवार से हैं। डॉ. राजेश के पिता हृदय रोग विशेषज्ञ रहे हैं तो वहीं नुपुर के पिता एयरफोर्स में अफसर रहे हैं। तलवार दंपति के घर में आरुषि का आगमन 1994 में हुआ था।
देश की सबसे चर्चित मर्डर मिस्ट्री जिसमें अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं इसकी जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपती को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। 31 मई 2008 को इस केस की जांच उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दंपती को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना।
हालांकि इसके बाद सीबीआई की एक दूसरी टीम ने इस मामले की जांच सितंबर 2009 में फिर से शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपती को प्राइम सस्पेक्ट माना।
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- फोटो : अमर उजाला
आरुषि-हेमराज मर्डर केस की टाइमलाइन-
16 मई, 2008 :आरुषि तलवार का शव घर में मिला।
17 मई, 2008 : नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली, राजेश तलवार ने उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप लगाया था।
18 मई 2008: यूपी एसटीएफ ने शुरू की जांच। पुलिस ने बताया कि आरुषि-हेमराज दोनों के मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही, पुलिस ने माना कि मर्डर में परिवार से जुड़े किसी शख्स का हाथ है।
19 मई, 2008: तलवार दंपति के पूर्व घरेलू नौकर विष्णु शर्मा पर भी पुलिस ने शक जताया।
21 मई, 2008: यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी जांच में शामिल हो गई।
22 मई, 2008: पुलिस ने शक जताया कि आरुषि की हत्या ऑनर किलिंग हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच शुरू की। साथ ही पुलिस ने आरुषि के एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। यह दोस्त लगातार उसके संपर्क में था और 45 दिनों में 688 बार उसकी आरुषि से फोन पर बात हुई थी।
23 मई, 2008 : पुलिस ने आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया।
29 मई, 2008: सीबीआई को सौंपी गई जांच।
01 जून, 2008 : सीबीआई ने जांच शुरू की।
03 जून, 2008: राजेश तलवार के क्लिनिक के कम्पाउंडर कृष्णा से पूछताछ के लिए सीबीआई ने उसे हिरासत में लिया।
27 जून, 2008 : नौकर राजकुमार को गिरफ्तार किया गया।
12 जुलाई, 2008 : नौकर विजय मंडल की गिरफ्तारी और डॉ. तलवार को मिली जमानत।
29 दिसंबर, 2010: सीबीआई ने केस में क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी, लेकिन अभिभावकों की भूमिका पर सवाल उठाए।
09 फरवरी, 2011: केस में तलवार दंपती आरोपी बने।
21 फरवरी, 2011: दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर ट्रायल कोर्ट को इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए।
19 मार्च, 2011: सुप्रीम कोर्ट गए पर वहां भी नहीं मिली राहत।
11 जून, 2012: सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की।
26 नवंबर, 2013: नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।
12 अक्टूबर, 2017: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को सबूतों के अभाव में किया बरी।