अरुण जेटली बेशक भाजपा के कद्दावर नेता रहे हों, लेकिन बुलंदी पर पहुंचने के बाद भी वह अपनों को कभी नहीं भूले। खासतौर से निजी स्टाफ को, जिनकी मदद के लिए वह हमेशा तत्पर रहते थे। वह अपने सभी सहयोगियों को परिवार का सदस्य मानते थे। जेटली के पारिवारिक सदस्य वरींद्र मेनी ने बताया कि यह अघोषित नियम बन गया था कि उनके सहयोगियों के बच्चे चाणक्यपुरी के उसी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, जहां जेटली के बच्चों ने पढ़ाई की थी।