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राज्यसभा के बाहर कुर्ता फाड़ने से, अनुच्छेद 370 के खात्मे तक, ऐसे बीता संसद का पूरा दिन

Mon, 05 Aug 2019 07:27 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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rajya sabha - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने को लेकर तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने सरकार का विरोध किया, लेकिन सरकार सफल रही। सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होने की बात करते हुए संकल्प पेश किया। अब अनुच्छेद 370 और 35ए हट जाने के साथ ही, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे।

370 और 35ए, दोनों को हटा तो लिया गया, लेकिन इस दौरान सदन में हो रहा विरोध और विपक्षियों का हंगामा भी कम नहीं रहा। आगे पढ़िए सरकार के इतने बड़े फैसले के विरोध में किसने फाड़ा कुर्ता और किसने दिए बयान-
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- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने का एलान सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में किया। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में लिया गया था। लअनुच्छेद 370 के खत्म होने के साथ अनुच्छेद 35-ए भी खत्म हो गया है जिससे राज्य के 'स्थायी निवासी' की पहचान होती थी।
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- फोटो : पीटीआई
एलान होते ही विरोध जताते हुए पीडीपी के दो सासंदों में से एक मीर फयाज ने अपना कुर्ता फाड़ लिया। इसके अलावा दोनों सासंदों ने भारत के संविधान को भी फाड़ने की भी कोशिश की।

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- फोटो : पीटीआई
पीडीपी सासंद की इस हरकत से नाराज होकर राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने मीर फयाज और नजीर अहमद को सदन से जाने के लिए कहा। 
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ghulam nabi azad - फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने पीडीपी सांसदो के संविधान फाड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हम संविधान के साथ खड़े हैं। हम हिंदुस्तान के संविधान की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा देंगे लेकिन आज भाजपा ने संविधान की हत्या कर दी।'  आजाद ने कहा कि कश्मीर में युद्ध जैसा माहौल बनाया गया है और राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजरबंद कर दिया गया है। 
 
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- फोटो : पीटीआई
आजाद ने शाह से राज्यसभा में बिल पेश करने से पहले उन्हें कश्मीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए कहा था। जिसपर शाह ने कहा कि मैं कश्मीर पर बयान देने के लिए तैयार हूं। मैं आपके सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार हूं। मुझे बोलने का मौका दीजिए। 
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- फोटो : पीटीआई
गृह मंत्री अमित शाह ने जैसे ही अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रस्ताव दिया, उसके बाद विपक्षी नेताओं ने संसद में हंगामा करना शुरू कर दिया था। एलान के बाद भी विपक्षियों का यह विरोध जारी रहा। 

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rajya sabha - फोटो : पीटीआई
वहीं लद्दाख से भाजपा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल का कहना है, मैं लद्दाख की तरफ से इस बिल का स्वागत करता हूं। वहां के लोग चाहते थे कि क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए। लद्दाख के लोग चाहते थे कि इस क्षेत्र को कश्मीर के प्रभुत्व और भेदभाव से मुक्त किया जाए, जो आज हो रहा है।
 
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- फोटो : पीटीआई
हालांकि अमित शाह ने राज्यसभा में चल रहे हंगामे के बीच ही सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का एलान किया। ये हैं इस फैसले की महत्वपूर्ण बातें-
  • गृहमंत्री अमित शाह ने संसद को बताया कि अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया गया है और इस आदेश पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।
  • अनुच्छेद 370 के खत्म होने के साथ अनुच्छेद 35-ए भी खत्म हो गया है जिससे राज्य के 'स्थायी निवासी' की पहचान होती थी।
  • सरकार ने अनुच्छेद 370 के खात्मे के साथ-साथ प्रदेश के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव किया है।
  • प्रस्ताव किया गया है कि जम्मू-कश्मीर अब पूर्ण राज्य नहीं रहेगा, बल्कि इसकी जगह दो केंद्र शासित प्रदेश होंगे।
  • एक का नाम होगा जम्मू-कश्मीर, दूसरे का नाम होगा लद्दाख।
  • जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी जबकि लद्दाख में कोई विधायिका नहीं होगी।
  • अनुच्छेद 370 का केवल एक खंड जस का तस रखा गया है जिसके तहत राष्ट्रपति किसी बदलाव का आदेश जारी कर सकते हैं।
  • गृहमंत्री ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने का प्रस्ताव वहां की सुरक्षा की स्थिति और सीमा-पार से आतंकवाद की स्थिति को देखते हुए लिया गया।
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