अमेरिकी एनबीए के लिए खेलने वाले पहले भारतीय बॉस्केटबॉल स्टॉर खिलाड़ी सतनाम सिंह ने बताया कि कड़ी मेहनत और जुनून के चलते वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
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nba star player satnam singh
ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रींस में चल रहे एनबीए के %बास्केटबॉल विदाउट बॉर्डर’ प्रशिक्षण शिविर में जूनियर खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देने के दौरान अमर उजाला से बातचीत की।
सात फुट दो इंच लंबे इस भारतीय खिलाड़ी का कहना है कि आजकल नए उदयीमान खिलाडिय़ों के लिए एनबीए का इस तरह का प्लेटफार्म मिल रहा है, यह जूनियर खिलाडिय़ों के लिए बड़ा मौका है।
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पंजाब के बरनाला जिले के बालकोर गांव में पैदा हुए 22 वर्षीय सतनाम का कहना है कि उस दौरान उन्हें अच्छे कोच से सीखने का कम ही मौका मिलता था। किसान के बेटे सतनाम ने बताया कि उन्होंने खेत में ही लकड़ी के खंबे पर बास्केट बनाकर उसमें घंटों प्रैक्टिस करते थे।
भारत में अधिक प्रसिद्ध क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी खेलों के बीच अन्य खेलों के दब जाने के सवाल पर उनका कहना है कि अब अन्य खेलों की तरह बास्केटबॉल ने भी अपनी जगह बनाना शुरू कर दिया है।
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स्कूलों से लेकर सरकार तक सभी अब सभी तरह के खेलों को प्रमोट कर रहे हैं। मेरे और अमज्योत सिंह की तरह जल्द ही भारत से बास्केटबॉल खिलाडिय़ों की बड़ी खेप निकलेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाएगी।
सतनाम को वर्ष 2015 में एनबीए के क्लब डलास मेवरिक्स ने चयन किया था और तभी से वह उस क्लब के लिए खेल रहे हैं। सतनाम ने बताया कि वह अमेरिका के क्लब के लिए खेलते जरूर हैं लेकिन मौका मिलता है तो भारतीय जूनियर बास्केटबॉल खिलाडिय़ों को टिप्स देते रहते हैं।