42 साल के लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री ने वन रैंक वन पेंशन की घोषणा की तो पूर्व पूर्व सैनिक के परिवार की आंखें बह निकली और उनका दर्द सामने आ गया।
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42 साल बाद OROP की घोषणा पर निकला दर्द, रो पड़ी आंखें
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वन रैंक वन पेंशन लागू होने के बाद पूर्व सैनिकों में भारी उत्साह है। शनिवार को इसे लेकर जो थोड़ा बहुत संदेह था वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी फरीदाबाद की जनसभा में उसे दूर कर दिया।
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हालांकि अभी भी कुछ लोगों का यह कहना है कि केंद्र सरकार ने आधे मन से इसे लागू किया है। वन रैंक वन पेंशन को लेकर सैनिकों के गांव के नाम से मशहूर भोंडसी में खूब उत्साह है।
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गुड़गांव के पूर्व सैनिकों ने कहा कि कई वर्षों बाद उन्हें न्याय मिला है। इसके लिए इन सभी ने केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है। वीआरएस को लेकर शनिवार तक आशंकित पूर्व सैनिकों को रविवार को मोदी के भाषण के बाद राहत मिली।
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गांव भोंडसी के पूर्व सैनिक रामपाल का कहना है कि वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा सिर्फ पैसे की बात नहीं थी। यह पूर्व सैनिकों के आत्मसम्मान के साथ भी जुड़ा हुआ था।
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अब यह पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार को इसके लिए धन्यवाद देना चाहते हैं।
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भारतीय सेना से रिटायर कर्नल रतन सिंह ने भी वन रैंक वन पेंशन के घोषणा का स्वागत किया है। मगर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इसे आधे मन से लागू किया है।
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इसे एक अप्रैल, 2014 से लागू होना था। मगर इसे एक जुलाई, 2014 से लागू किया गया है।
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इसमें तीन महीने का नुकसान हुआ है। वहीं सेवानिवृत्त मेजर टीसी राव का कहना है कि केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के नाम पर खेल किया है। पांच वर्ष तक कोई रिव्यू नहीं होगा यह भी गलत है।