सीबीआई ने तलवार दंपति को आरोपी बनाते हुए एक बड़ी दलील थी कि हेमराज को आरुषि के साथ कमरे में आपत्तिजनक हालत में देखकर डॉ. राजेश तलवार ने गुस्से में आकर गोल्फ स्टिक से दोनों का मर्डर कर दिया था। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में उसकी ये थ्योरी पूरी तरह ध्वस्त हो गई पढ़ें कैसे हुआ ये...
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- फोटो : अमर उजाला
बचाव पक्ष की दलील
जांच में ऐसे कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिले हैं जिससे साबित होता हो कि 15 मई की रात हेमराज की हत्या आरुषि के कमरे में की गई थी।
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- फोटो : लाल सिंह
महत्वपूर्ण साक्ष्य
सीएफएसएल दिल्ली की 19 जून 2008 की रिपोर्ट जिससे यह पता चला था कि आरुषि के तकिये, बेडशीट और गद्दे की जांच में हेमराज का कोई डीएनए या खून नहीं पाया गया था।सीडीएफडी हैदराबाद के डीएनए विशेषज्ञ एसपीआर प्रसाद ने 6 नवंबर 2008 की रिपोर्ट में कहा था कि आरुषि के कमरे से सिर्फ उसी का डीएनए मिला था। सीएफएसएल दिल्ली के सुरेश कुमार सिंगला ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि हेमराज के कपड़ों पर आरुषि का ब्लड नहीं मिला था।
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इस तरह बचाव पक्ष ने सीबीआई की उस थ्योरी को ही गलत साबित कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखकर गुस्से में राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने दोनों की हत्या की थी।
इस थ्योरी के मुताबिक हेमराज 15 मई की रात आरुषि के कमरे में था। बचाव पक्ष ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर साबित किया कि हेमराज के आरुषि के कमरे में मौजूद होने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। तलवार दंपति के बरी होने में ये तथ्य काफी अहम साबित हुआ।