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खबर जो खो गईः 11 साल पहले आज ही के दिन हुआ था सबसे बड़ा हत्याकांड, पढ़ें पूरा घटनाक्रम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 15 May 2019 06:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली से सटे नोएडा में 11 साल पहले एक हत्याकांड ने पूरे देश और दुनिया को दहला कर रख दिया। जब यह मामला सामने आया था तो लोग इस बात से हैरान रह गए थे कि आखिर कैसे एक मां-बाप अपनी फूल सी बेटी की हत्या कर सकते हैं। हम बात कर रहे हैं देश की सबसे चर्चित मर्डर मिस्ट्री की जो आज तक सुलझाई नहीं जा सकी है। वो हत्याकांड था आरुषि-हेमराज हत्याकांड। 15 मई की रात आरुषि तलवार और हेमराज की हत्या की गई थी। आज उस खौफनाक हत्याकांड की 11वीं बरसी है, आइए जानते हैं क्या हुआ था उस रात और अब 11 साल बाद क्या है उस केस का स्टेटस...
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- फोटो : अमर उजाला
पूरे देश को स्तब्ध कर देने वाला यह हत्याकांड 15 मई 2008 को अंजाम दिया गया था। हालांकि पूरी दुनिया के सामने ये घटना 16 मई 2008 को आई जब राजेश और नूपुर तलवार की बेटी आरुषि तलवार की खून से लथपथ डेड बॉडी उसके ही बेडरूम में मिली थी। उसके गले पर गहरा जख्म पाया गया था। उस दिन उनका नौकर हेमराज घर से गायब था, उस वक्त लोगों को ये शक था कि नौकर ने ही ये हत्या की और फरार हो गया।
हालांकि 17 मई की सुबह जब घर के नौकर हेमराज का भी खून से लथपथ शव आरूषि के घर की छत पर पड़ा हुआ मिला तो इस मामले में नया मोड़ आ गया। अब तक जिस नौकर की तलाश आरोपी के रूप में हो रही थी उसकी लाश मिलने से पूरी जांच की दिशा ही बदल गई।

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- फोटो : लाल सिंह
इसके बाद 18 मई को पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच में कहा कि दोनो की हत्या सर्जरी के लिए प्रयुक्त उपकरण के जरिए की गई है। इससे आरुषि के माता-पिता संदेह के घेरे में आने लगे। 19 मई 2008 को राजेश तलवार के पूर्व नेपाली नौकर विष्णु शर्मा को संदिग्धों में शामिल किया गया। 
दो दिन बाद 21 मई 2008 को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में हत्या के एंगल से जांच शुरू की और पुलिस की जांच आरुषि के माता-पिता पर आकर टिक गई। 22 मई 2008 को आरुषि हत्याकांड की ऑनर किलिंग के एंगल से जांच शुरू होने पर परिवार संदेह के घेरे में आ गया। मामले में पुलिस ने आरुषि के दोस्त से पूछताछ की जिससे आरुषि ने हत्या के दिन से 45 दिन पहले तक कुल 688 बार फोन पर बात की थी।

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- फोटो : अमर उजाला
इन सब बातों के सामने आने पर परिवार के साथ ही आरुषि के कैरेक्टर का मीडिया ट्रायल शुरू हो चुका था। एक ऐसा मामला जिसमें पुलिस की शुरुआती जांच में बहुत लापरवाही की गई उसमें लोग तमाम तरह के कयास लगाने लगे थे।
23 मई 2008 को आरुषि के पिता राजेश तलवार को आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद इस केस की गंभीरता के चलते 1 जून 2008 को सीबीआई को मामले की जांच सौंपी गई। यहीं से शुरू हुई इस केस की सीबीआई जांच जिसका आज तक नतीजा न निकल सका है। 

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- फोटो : अमर उजाला
13 जून 2008 को सीबीआई ने राजेश तलवार से पूछताछ के बाद नौकर कृष्णा को भी गिरफ्तार कर लिया। धीरे-धीरे इस केस की जांच आगे बढ़ रही थी। 20 जून 2008 को दिल्ली के सीएफएसएल में राजेश तलवार का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। अब तक इस केस की जांच की जद में आरुषि की मां भी आ चुकी थीं। 25 जून 2008 को आरुषि की मां नूपुर तलवार का दूसरा लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। नुपुर का पहला टेस्ट किसी निर्णय तक नहीं पहुंचा था। 
इन सब के बीच राजेश तलवार की जमानत की कोशिश जारी थी लेकिन 26 जून 2008 को गाजियाबाद की अदालत ने राजेश तलवार को जमानत देने से मना कर दिया। कानून के तहत आरोपियों का नार्को टेस्ट किसी सबूत के रूप में नहीं माना जा सकता। 3 जुलाई 2008 को आरोपियों के नॉर्को टेस्ट को चैलेंज करने वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। 12 जुलाई 2008 को राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल ने जमानत दे दी।

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- फोटो : अमर उजाला
करीब डेढ़ साल बाद 5 जनवरी 2010 को सीबीआई ने आरोपियों का नार्को टेस्ट करने के लिए अदालत का रुख किया। 29 दिसंबर 2010 को सीबीआई ने मामले में अपनी क्लोसर रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें नौकरों को क्लीन चिट दे दी। जबकि रिपोर्ट में आरुषि के मां-बाप पर संदेह जताया गया। हालांकि इसके लिए भी उनके पास कोई सबूत नहीं था।
25 जनवरी 2011 को गाजियाबाद की अदालत के परिसर में राजेश तलवार पर हमला किया गया। 9 फरवरी 2011 के दिन कोर्ट ने सीबीआई की उस रिपोर्ट का संज्ञान भी लिया जिसमें उसने कहा कि दंपति ने दोनों का मर्डर किया और सबूत मिटाए। 21 फरवरी 2011 को आरोपी दंपति ने ट्रायल कोर्ट के समन को खारिज करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 

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- फोटो : अमर उजाला
18 मार्च 2011 हाईकोर्ट ने समन को रद्द करने की उनकी याचिका को खारिज करते हुए उनके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। 19 मार्च 2011 को दंपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जिसने उनके खिलाफ चल रही जांच पर स्टे लगा दिया।
लगभग एक साल बाद 6 जनवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने तलवार की याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल जारी रखने की इजाजत दे दी। 11 जून 2012 के दिन स्पेशल जज एस लाल के सम्मुख मामले का ट्रायल शुरू हुआ।

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- फोटो : अमर उजाला
उसके सवा साल बाद 10 अक्टूबर 2013 को मामले में आखिरी जिरह शुरू हुई। 25 नवंबर 2013 को गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को दोषी पाया। 26 नवंबर 2013 को सीबीआई कोर्ट ने आरुषि-हेमराज की हत्या के मामले में दंपति को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके बावजूद तलवार दंपति ने हौसला नहीं हारा था। 21 जनवरी 2014 को राजेश और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 19 मई 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में तलवार दंपति को जमानत देने से मना कर दिया।

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आरुषि की नानी लता - फोटो : अमर उजाला
फिर तीन साल बाद एक बार फिर इस केस में नया मोड़ आया। 11 जनवरी 2017 को आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मामले में सीबीआई के उन्हें दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। 17 सितंबर 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट  ने हेमराज-आरुषि हत्याकांड के मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
12 अक्तूबर 2017 को सबूतों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को मामले में बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच के दौरान सीबीआई तलवार दंपति के खिलाफ ऐसे सबूत पेश नहीं कर पाई जिसमें उन्हें सीधे दोषी माना जा सके। कोर्ट ने ये भी कहा ऐसे मामलों में तो सुप्रीम कोर्ट भी बिना पर्याप्त तथ्यों और सबूतों के किसी को इतनी कठोर सजा नहीं सुनाता।
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