arvind kejriwal
बता दें कि दोबारा सरकार बनने के बाद साल 2015 में दिल्ली विधानसभा में एक विधेयक पास हुआ था जिसमें विधायकों की सैलरी को 12,000 से 50,000 करने का प्रावधान था। वहीं भत्तों को 88,000 से बढ़ाकर 2,10,000 करने की व्यवस्था की गई थी। ऐसा होता तो दिल्ली के विधायकों की सैलरी असम के विधायकों को छोड़कर देशभर में सबसे ज्यादा होती। इसको लेकर केजरीवाल को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस विधेयक को केंद्र सरकार ने दोबारा विचार के लिए वापस दिल्ली सरकार को भेज दिया था।