फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AAP विधायकों के लिए नहीं आ रहे शादी के रिश्ते तो कर डाली ये मांग, भाजपा ने भी किया समर्थन

Sat, 07 Apr 2018 04:13 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
aap mla - फोटो : vivek nigam
दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायकों का दर्द सामने आ रहा है। उनका कहना है जो विधायक कुंवारे हैं उनकी शादी नहीं हो रही, उनके के लिए रिश्ते नहीं आ रहे। अपना दुख बताते हुए उन्होंने एक मांग रख डाली जिसका काफी समय बाद भाजपा विधायकों ने भी समर्थन किया।
विज्ञापन

2 of 6
डेमो पिक
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों ने एक बार फिर अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इतनी कम सैलरी में काम नहीं चलता। घर चलाना मुश्किल हो गया है। यहां तक कि इतने कम वेतन की वजह से शादी भी नहीं हो रही है। आप की इस मांग को भाजपा विधायकों का भी समर्थन मिला।
विज्ञापन

3 of 6
aap mla
विधायकों की मांग है कि उनका वेतन 2-2.5 लाख कर दिया जाए। मालूम हो कि वर्तमान में दिल्ली के विधायकों की सैलरी मात्र 12 हजार रुपए है। पार्टी के विधायक विशेष रवि ने बताया कि जो लोग शादीशुदा हैं उनका इतनी सैलरी में घर चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं जिस विधायक की शादी नहीं हुई उनके लिए रिश्ते नहीं आ रहे क्योंकि इतनी कम सैलरी वाले को कोई अपनी बेटी नहीं देना चाहता।

4 of 6
ओपी शर्मा
बीजेपी विधायक ओपी शर्मा ने आप विधायकों के इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा हम इस प्रस्ताव के साथ हैं। सीएम को इस पर सकारात्मक रूप से काम करना चाहिए। विधायकों की सैलरी कम होने की वजह से उनकी शादी नहीं हो रही तो उनका वेतन बढ़ना ही चाहिए।
विज्ञापन

5 of 6
manish sisodia - फोटो : ANI
इस पर मनीष सिसोदिया ने राय रखी कि इस मुद्दे पर एक कमेटी बननी चाहिए। एक 6 सदस्यों वाली कमेटी बने जो गृहमंत्री से मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
arvind kejriwal
बता दें कि दोबारा सरकार बनने के बाद साल 2015 में दिल्ली विधानसभा में एक विधेयक पास हुआ था जिसमें विधायकों की सैलरी को 12,000 से 50,000 करने का प्रावधान था। वहीं भत्तों को 88,000 से बढ़ाकर 2,10,000 करने की व्यवस्था की गई थी। ऐसा होता तो दिल्ली के विधायकों की सैलरी असम के विधायकों को छोड़कर देशभर में सबसे ज्यादा होती। इसको लेकर केजरीवाल को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस विधेयक को केंद्र सरकार ने दोबारा विचार के लिए वापस दिल्ली सरकार को भेज दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें