बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने अखबारों में विज्ञापन जारी कर लोगों को संविधान दिवस की बधाई दी जिसमें संविधान की प्रस्तावना को ही गलत छाप दिया।
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आप के विज्ञापन में संविधान की प्रस्तावना से छेड़छाड़, मांगी माफी
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इस विज्ञापन में संविधान की प्रस्तावना में लिखे धर्मनिरेपक्षता और समाजवादी शब्द को ही गायब कर दिया गया। हालांकि विवाद होने पर पार्टी ने सफाई देते हुए इसे मानवीय भूल करार दिया और इसके लिए माफी मांग ली।
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आप के विज्ञापन में संविधान की प्रस्तावना से छेड़छाड़, मांगी माफी
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हालांकि विपक्ष ने इस विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए आम आदमी पार्टी सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़ा किया है। उधर दिल्ली सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
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सरकार ने दिल्ली सरकार के जनसंपर्क विभाग के निदेशक को इस मामले की जांच कर चार दिन के अंदर सफाई पेश करने को कहा है। आज के ही अखबारों में भारत सरकार ने भी संविधान दिवस की बधाई देने वाले विज्ञापन छपवाए हैं जिसमें संविधान की पूरी प्रस्तावना को देखा जा सकता है। (फोटो: केंद्र सरकार का विज्ञापन)
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चौंकाने वाली बात ये है कि ज्यादातर अखबारों में ये दोनों ही विज्ञापन एक ही पेज पर आगे-पीछे दिए गए हैं। (फोटो: दिल्ली सरकार द्वारा जारी विज्ञापन)
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असल में 26 नवंबर 1949 में स्वीकार किए गए मूल संविधान में धर्मनिरेपक्षता और समाजवादी शब्द शामिल नहीं थे। इंदिरा गांधी की सरकार ने 1976 में 42वें संविधान संशोधन के बाद इन दोनों शब्दों को संविधान में शामिल किया था। (फोटो: संविधान दिवस पर केंद्र सरकार द्वारा जारी विज्ञापन)