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नोटबंदी ने तबाह की इस रिक्शाचालक की जिंदगी, जीवनभर की कमाई पर लगा ग्रहण

Wed, 01 Feb 2017 03:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली में रिक्शा चलाने वाले मोहम्मद फारुक थायरॉयड की बीमारी से ग्रसित हैं। डॉक्टर ने उन्हें रिक्शा न चलाने की सलाह दी है। फिर भी फारुक रिक्शा चलाते रहे ताकि वह कुछ पैसे जोड़ सकें और कुछ समय बाद रिक्शा चलाने की परेशानी निजात पा सकें।
(खबर व फोटो साभारः हफ‌िंगटन पोस्ट)
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पाई-पाई जोड़कर उन्होंने जो पैसे जमा किए थे वो पीएम के नोटबंदी की घोषणा के चार दिन बाद ले जाकर बैंक में जमा कर दिए। 3 जनवरी को जब वो अपना पैसा निकालने बैंक गए तो उन्हें नोटबंदी की ऐसी मार पड़ी जिसने उनकी जिंदगी को ही खतरे में डाल दिया है।
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दरअसल रिक्शा चलाकर और कारें साफ कर फारुक ने जो पैसे बचाए थे नोटबंदी के बाद से अब वो उसकी पत्नी के जनधन अकाउंट में फंसे पड़े हैं। इस पैसे से फारुक ई-रिक्शा लेने वाले थे लेकिन अब उन्हें अपने ही पैसे निकालने के लिए तरह-तरह के सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा नोटबंदी का ऐलान किए जाने के चार दिन बाद शकीला ने बैंक लाइन में लगकर अपनी आधी बचत यानी 1 लाख रुपए आईडीबीआई बैंक में जमा किए। कुछ दिनों बाद शकीला ने बाकी के पैसे भी बैंक में जमा कर दिए।
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जमा करते वक्त तो शकीला को कोई परेशानी नहीं हुई लेकिन जब 3 जनवरी को वह अपने अकाउंट से 10 हजार रुपए निकालने गई तो बैंक अधिकारियों ने उसे बताया कि उसका जनधन अकाउंट 'लॉक' कर दिया गया है।
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थायरॉयड बीमारी के चलते डॉक्टर ने फारुक को रिक्शा चलाने को मना किया है। पत्नी के जनधन अकाउंट में जमा पैसों से ही फारुक ई-रिक्शा खरीदना चाहता था ताकि परिवार तो चल ही सके साथ ही सेहत पर भी कोई विपरीत असर ना पड़े।
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बैंकवाले पूछ रहे अजीब सवाल
- शकीला ने अपने अकाउंट में दो बार में पैसे जमा किए इसलिए बैंक अधिकारी ये जानना चाहते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।
-वो ये भी पूछ रहे हैं कि इतने कम समय में इतना पैसा दोबारा कहां से आया।
-बैंक ये भी जानना चाहता है कि आखिर ये पैसे उन्हीं के हैं या किसी और के।

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नहीं मिला कैश - फोटो : अमर उजाला
फारुक बिहार के दरभंगा के मूल निवासी हैं और पिछले 15 सालों से दिल्ली में रहकर रिक्शा चला रहे हैं। 2014 में उन्होंने 10 हजार में अपना साइकिल रिक्शा खरीदा था। फारुक का पांच लोगों का परिवार दो कमरे के मकान में सिविल लाइन्स में रहता है।

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एटीएम के बाहर लगी लाइन - फोटो : अमर उजाला
वैसे तो फारुक रिक्शा चलाकर रोजाना 300-400 रुपए रोजाना ही कमाते हैं। लेकिन अत‌िरिक्त आमदनी के लिए वो कारों की सफाई करते हैं जिससे वो महीने में 5000 रुपए और कमा लेते हैं।

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- फोटो : rajesh
घर के खर्चों के बाद होने वाली बचत को जोड़कर ही फारुक ने जो पैसे जमा किए थे उन्हें ही जनधन अकाउंट में जमा किया जो अब फंस चुके हैं। 12 नवंबर को फारुक ने ई-रिक्शा लेने का फैसला किया था जो पीएम के नोटबंदी के ऐलान के बाद धरा का धरा रह गया। यहां तक कि शकीला को इस बात का और भी अफसोस है कि पिछले महीने ही एक सेकंडहैंड ई-रिक्शा 50 हजार में बिक रहा था लेकिन पैसे बैंक में होने के चलते वह नहीं खरीद पाए।
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- फोटो : अमर उजाला
एक तरफ तो फारुक की बचत बैंक में फंस गई है वहीं नोटबंदी के बाद से ‌साइकिल रिक्शा चलाने से होने वाली उनकी कमाई भी घट गई है। उनकी पत्नी शकीला का पीएम मोदी को यह संदेश है कि, 'आपने नोटबंदी का फैसला भले ही नेक इरादे से किया हो लेकिन इससे गरीब परेशान हो रहा है।'
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